पिछले पांच दिनों से नहीं मिला बबिता पांडे का कोई सुराग, दोस्तों पर गहराया पुलिस का शक

उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता हुई युवती का पिछले छह दिनों से कुछ पता नहीं चला है। पुलिस की ओर से युवती की खोजबीन अभी भी जारी है।
दो दोस्तों के साथ ट्रैकिंग पर गई थी युवती
बता दें 25 मई को बबिता पांडे (24) निवासी नैनीताल अपने दो मित्रों हरमन पाल सिंह निवासी दिनेशपुर और हरमन प्रीत सिंह निवासी उत्तर प्रदेश के साथ उधम सिंह नगर से उत्तरकाशी के लिए रवाना हुई थीं। 26 – 27 मई इस समूह ने हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया। जिसके बाद 28 मई को तीनों रेथल गांव पहुंचे। तीनों 28 को रेथल गांव ही ठहरे हुए थे। गांव में लगे CCTV कैमरों में बबिता को अपने दोनों दोस्तों के साथ आखिरी बार देखा गया था।
29 मई को बेस कैंप से लापता हुई थी बबिता
29 मई तीनों मित्रों ने रेथल से दयारा बुग्याल के लिए अपनी ट्रैकिंग शुरू की और रात में गोई (Goi/Ghoi) बेस कैंप पर रुके। इसी कैंप से 29 मई की दरम्यानी रात को बबिता संदिग्ध और रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई। पुलिस ने दोनों दोस्तों के खिलाफ केस दर्ज कर अपहरण के तहत धारा 140 (3) लगाई है। बबिता के परिजन भी उत्तरकाशी में डेरा जमाये हुए हैं। पुलिस की ओर से बबिता के दोस्तों हरमन पाल सिंह और हरमन प्रीत सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
युवती के दोस्तों पर गहराया शक
पुलिस इस मामले की हर एंगल (जैसे आपसी अनबन या कोई अन्य संदिग्ध गतिविधि) से जांच कर रही है। इसके अलावा, ट्रेकिंग गाइड और एजेंसी से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। बता दें प्रशासन को बबिता के लापता होने की सूचना 30 मई को मिली थी। जिसके बाद 31 मई से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है। इस संयुक्त अभियान में आर्मी, ITBP, SDRF, NDRF, स्थानीय पुलिस, वन विभाग, SOG और आपदा प्रबंधन की टीमों सहित लगभग 150 जवान और अधिकारी जुटे हुए हैं। घने जंगलों, खड़ी ढलानों और ट्रेकिंग रूटों पर ड्रोन की मदद से भी तलाश की गई है।
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झील पर फोकस रेस्क्यू टीम का फोकस
पिछले 5 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद भी जब कोई पुख्ता सुराग हाथ नहीं लगा, तो अब सर्च ऑपरेशन का पूरा ध्यान गोई कैंप स्थल के पास स्थित एक रहस्यमयी झील पर टिक गया है। एक 6 सदस्यीय विशेष डीप-डाइव (जल पुलिस/SDRF) टीम आधुनिक उपकरणों के साथ इस झील की गहराइयों को खंगालने के लिए बुलाई गई है।
ट्रैकिंग परमिट में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
घटना की जांच के दौरान उत्तरकाशी जिला पर्यटन विभाग और जिला पर्यटन विकास अधिकारी के.के. जोशी ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग के आधिकारिक ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ (Explore Uttarkashi) पोर्टल पर बबिता पांडे या उनके साथियों के नाम का कोई वैध डिजिटल परमिशन/रजिस्ट्रेशन दर्ज नहीं था।
एजेंसी पर लटकी कार्रवाई की तलवार
जांच में पता चला कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से ये लोग गए थे, उसने सरकार के राजस्व और दैनिक क्षमता नियमों (प्रतिदिन केवल 150 ट्रेकर्स की अनुमति) को दरकिनार करने के लिए एक पुराने/एक्सपायर हो चुके फिजिकल परमिट पर बबिता और उसके दोस्तों के नाम पेस्ट कर दिए थे। जब चेकपोस्ट पर QR कोड स्कैन किया गया, तो वह पुराने ट्रेकर्स का डेटा दिखा रहा था। फर्जीवाड़े के कारण रेस्क्यू टीम को शुरुआती समय में यह समझने में देरी हुई कि पहाड़ पर कौन और किस एजेंसी के माध्यम से गया था। पर्यटन विभाग ने इस लापरवाही और धोखाधड़ी के लिए संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।