उत्तराखंड: वैक्सीन लगी ही नहीं, मोबाइल पर आ गया वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट

देहरादून: कोरोना वैक्सीन के संबंध में सरकार भले ही कितने ही दावे करे, लेकिन राज्य में अब भी लोगों को वैक्सीन समय पर और आसानी से नहीं मिल पा रही है। अब तक तक तो पहली डोज वालों को ही दिक्कतें हो रही थी। अब दूसरी डोज लगाने वालों के सामने भी समस्या आ रही है। राजधानी देहरादून में एक ऐसा मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग बिना कोविड वैक्सीन लगे ही वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट मोबाइल पर आ गया।

राजधानी देहरादून में वैक्सीनेशन में तकनीकी दिक्कतों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वैक्सीन लगाने गए व्यक्ति को वैक्सीनेशन सेंटर से वैक्सीन की कमी बताकर लौटा दिया गया, लेकिन जब वह घर पहुंचे तो उनके फोन पर वैक्सीन लगने का मैसेज मिला। मामला प्रेमनगर का है। इंदर सिंह नेगी ने कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जिसके बाद क्लेंमनटाउन के कैंट अस्पताल में स्लॉट बुक हो गया।

वह अपनी बेटी के साथ सेंटर पर पहुंचे। इंदर सिंह नेगी की बेटी अनुष्का ने बताया कि जब वह अपने पिता को लेकर सेंटर पर पहुंची तो वहां वैक्सीन नहीं होने की बात कही गई। जबकि हमारा स्लॉट बुक था। देर शाम वैक्सीन न लगने पर वे अपने बुजुर्ग पिता को लेकर घर चले आए। लेकिन घर पहुंचते ही वैक्सीनेशन के लिए दर्ज कराए गए फोन नम्बर पर उनके पिता इंदर सिंह नेगी को वैक्सीन की डोज लगने का मैसेज आ गया। वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लिया।

अनुष्का का कहना है कि बिना वैक्सीन लगे ही मोबाइल पर वैक्सीन लगने का मैसेज आ गया है। जब तक ये पोर्टल की ओर से डिलीट नहीं होगा, तब तक उनके पिता को वैक्सीन नहीं लग पाएगी। मामले को गंभीरता से देखते हुए शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि यह तकनीकी रूप से गड़बड़ी का मामला है। इसके लिए वह अधिकारियों को ऐसे मामलों में एहतियात बरतने के निर्देश देंगे।

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