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Paris Olympics 2024 में पाकिस्तान के अरशद नदीम को मिले 50 हजार डॉलर, Neeraj Chopra को नहीं मिले पैसे, जानें वजह

पेरिस ओलंपिक में भाला फेंक इवेंट में पाकिस्तान के अरशद नदीम(Arshad Nadeem) ने भारत के जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा( Neeraj Chopra) को पछाड़ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। पाकिस्तान के लिए केवल अरशद ही एक मात्र एथलीट है जिसने देश के लिए व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीता है। 

भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। लेकिन क्या आपको पता है कि ओलंपिक मेडल जीतने वाले अरशद और सिल्वर जीतने वाले नीरज को कितना पैसा (Neeraj Chopra Prize Money) मिला है? अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते है।

Arshad Nadeem को मिली इतनी प्राइज मनी

अरशद को पेरिस ओलंपिक में गोल्ड जीतने पर करीब 50 हजार डॉलर मिले है। भारतीय रूपयों के हिसाब से इसकी कीमत करीब 42 लाख है। तो वहीं पाकिस्तान की करन्सी के मुताबिक इसकी कीमत करीब एक करोड़ 40 लाख है। ऐसे में आपके मन में सवाल होगा कि सिल्वर मेडल जीतने वाले नीरज को कितने पैसे मिले है। तो इसका जवाब है कुछ नहीं।

Neeraj Chopra को नहीं मिली कोई राशी, जानें वजह

जी हां आपको ये जानकर हैरानी होगी कि नीरज चोपड़ा को कोई प्राइज मनी नहीं दी गई है। बता दें कि पेरिस ओलंपिक में केवल गोल्ड मेडलिस्ट के लिए ही प्राइज मनी रखी है। इसके साथ ही एथलेटिक्स के अलावा किसी और इवेंट में जीतने वालों के लिए कोई भी प्राइज मनी नहीं रखी गई है। हालांकि आने वाले अगले लॉस एंजिलिस ओलंपिक में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल एथलीट्स को भी प्राइज मनी दी जाएगी।

पाकिस्तान के अरशद नदीम ने रचा इतिहास

बता दें कि पाकिस्तान ने ओलंपिक में करीब 32 साल बाद मेडल अपने नाम किया है। आखिरी बार साल 1992 में पाकिस्तान ने गोल्ड मेडल जीता था। पाकिस्तान ने ओलंपिक में अब तक केवल चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए है। जिसमें से तीन मेडल हॉकी में आए थे। ऐसे में अशरफ ने देश को चौथा मेडल जैवलिन थ्रो में दिलाया है। साथ ही वो देश के लिए पहले ऐसे एथलीट बन गए है जिसने व्यक्तिगत इवेंट में गोल्ड मेडल जीता हो।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल मीडिया से जुड़ी युवा पत्रकार उमा कोठारी इस समय खबर उत्तराखंड.कॉम के साथ काम कर रही हैं। उमा अलग-अलग बीट पर खबरें लिखती हैं, जिनमें देश-दुनिया की राजनीतिक गतिविधियों की अहम खबरें, मनोरंजन, खेल और ट्रेंड से जुड़ी अपडेट शामिल हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए वे ट्रेंड और तथ्य दोनों का संतुलन बनाए रखती हैं, ताकि पाठकों तक सही और ज़रूरी जानकारी पहुंचे।
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