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BJP में 2027 विधानसभा चुनाव का टिकट मिलना नहीं आसान, 3 परीक्षाओं को करना होगा पार

BJP में 2027 विधानसभा चुनाव का टिकट पाना किसी भी नेता के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला है। चाहे वो विधायक हो या फिर मंत्री। हर किसी को पार्टी की 3 कसौटी से होकर गुजरना पड़ेगा। इन तीनों ही परीक्षाओं में जो पास होगा उसका ही टिकट फाइनल होगा।

2027 विधानसभा चुनाव का टिकट मिलना नहीं आसान

2027 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के तमाम नेता तैयारी में जुटे हैं। BJP विधायक और मंत्री फिर से चुनावी मैदान में उतरने का ख्वाब देख रहे हैं। लेकिन इनके लिए इस बार टिकट पाना इतना आसान नहीं रहने वाला है। बता दें पार्टी इस बार अपने विधायकों और मंत्रियो की कड़ी परीक्षा लेने जा रही है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार टिकट पाना इतना आसान नहीं रहने वाला है।

तीन सर्वे होने के बाद पार्टी तय करेगी टिकट

विधायक और मंत्रियों को फिर से टिकट पाने के लिए 3 कसौटी को पार करना होगा। यानि की 3 परीक्षाएं होंगी जिसमें मिले नंबर के आधार पर ही टिकट का फैसला किया जाएगा। तीन कसौटियों की बात करें तो वो राज्य संगठन और सीएम की रिपोर्ट, इंटर्नल सर्वे और केंद्रीय नेता अमित शाह की ओर से वरिष्ठ जनों का सर्वे शामिल है।

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बता दें कि इसमें सरकार और संगठन के बीच समन्वय, संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी, जनता के बीच छवि, क्षेत्र में उपलब्धता, समस्याओं के समाधान की क्षमता और धरातल पर किए गए कार्यों को देखा जाएगा। इसके साथ ही ये भी देखा जाएगा कि जनप्रतिनिधि पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को कितनी प्रभावी ढंग से आम जनता तक पहुंचा पा रहे हैं।

पार्टी को डेंट पहुंचाने वाले नेताओं के टिकट पर खतरा

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उन्हीं नेताओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा जो संगठन और जनता दोनों की कसौटी पर खरे उतरेंगे। बीजेपी के इस कदम से उन विधायकों को भी झटका लग सकता है जो अपने कार्यकाल में सत्ता की हनक दिखाने से पीछे नहीं रहे.और पार्टी को डेंट पहुंचाते रहे।

इन नेताओं का काट सकता है टिकट

बता दें ऐसे नेताओं की फेहरिस्त बीजेपी में कम नहीं है। लिस्ट में पहला नाम उमेश शर्मा काऊ का है। जो हाल ही में चर्चाओं में आए हैं। रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ पर शिक्षा निदेशक की मारपीट के आरोप हैं। इसके अलावा प्रेमचंद अग्रवाल, अरविंद पांडे, गणेश जोशी और रेणु बिष्ट का नाम भी इस सूची में शामिल है। जिन्होंने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया है।

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बता दें ये ऐसे विधायक रहे जो अपने इस कार्यकाल में चर्चाओं में रहे हैं। कभी वजह इनके तल्ख तेवर रही तो कभी अपनों के खिलाफ ही आवाज उठाना। अब ऐसे नेताओं के लेकर संगठन, सरकार, जनता और हाईकमान क्या सोचता है इसकी तस्वीर भी बीजेपी की परीक्षा से साफ हो जाएगी ताकि फिर से ऐसे नेता को टिकट न मिले जो काम से ज्यादा विवाद में फंसा रहे। बीजेपी का ये कदम टिकट बंटवारे के साथ-साथ मंत्रियों और विधायकों को पूरे कार्यकाल में सक्रिय और जवाबदेह बनाए रखने के लिए भी कारगार साबित होने वाला है।

Sakshi Chhamalwan

उत्तराखंड की युवा और अनुभवी पत्रकार साक्षी छम्मलवाण टीवी और डिजिटल मीडिया दोनों में कार्य का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वे खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) से जुड़ी हैं। उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल, देश-दुनिया की प्रमुख खबरें और धर्म से जुड़े विषयों पर इनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक और गहन होती है। उत्तराखंड | TV + Digital Media खबर उत्तराखंड
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