उत्तराखंड में गिरता सेब का उत्पादन चिंता का विषय, प्रजातियों पर शोध करने की मांग

हल्द्वानी : नैनीताल जिले में सेब का सबसे ज्यादा उत्पादन रामगढ़ मुक्तेश्वर इलाके में होता है, लेकिन काश्तकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में सेब की जिन प्रजातियों का बेहतर उत्पादन होता था उसमें अब कमी आने लगी है, लिहाजा यह एक चिंता का विषय बनता जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने रामगढ़ में पैदा हो रही सेब की प्रजातियों पर शोध करने की मांग उठाई है।

कश्मीर और हिमाचल के बाद सेब उत्पादन में उत्तराखंड का नाम आता है, जहां नैनीताल जिले में रामगढ़ का सेब विश्व प्रसिद्ध है। मौसम में बदलाव के चलते ओलावृष्टि और बारिश की वजह से सेब की गुणवत्ता पिछले कुछ समय से तो खराब हो ही रही है लेकिन काश्तकारों का कहना है 20 से 25 साल पहले सेब की जिन प्रजातियों का बेहतर उत्पादन रामगढ़ इलाके में होता था उन प्रजातियों में अब सेब की क्वालिटी और उत्पादन दोनों कम होते जा रहे हैं. लिहाजा यह एक सोचनीय विषय है. उत्तराखंड के सेब को मौसम की मार के चलते नुकसान हो रहा है. उत्तराखंड में सेब की बागवानी के लिए किसी नए मॉडल को लागू करने की आवश्यकता महसूस हो रही है.लिहाजा अनुसंधान केंद्रों को रामगढ़ स्थित बागानों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि सेब के व्यापार से काश्तकार प्रभावित हो रहा है और लगातार घाटा सहने से उत्पादक बागवानी से मुंह मोड़ने लगे हैं।

कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक के मुताबिक मौसम चक्र में आए बदलाव की वजह से सेब के उत्पादन पर काफी गहरा असर पड़ा है. इसके अलावा पिछले कई सालों से बगीचों का जीर्णोद्धार भी नहीं हो पाया है, जिससे सेब के उत्पादन पर लगातार असर पड़ता चला जाता है क्योंकि पिछले कई सालों में मौसम चक्र में जो बदलाव आया है. उसके अनुसार सेब के लिए जरूरी तापमान में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है, फिलहाल काश्तकारों की परेशानी को देखते हुए सेब की नई वैरायटी को लाने पर विचार किया जा रहा है, वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि काश्तकार अपने पुराने बगीचों का जीर्णोद्धार जरूर करें जिससे सेब के उत्पादन पर दोबारा से फर्क देखने को मिल सकता है।

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