कांस्टेबल सलमा सैयद को हर कोई कर रहा सलाम, भर आई डॉक्टरों-नर्सों की आंखें…जानिए क्यों?

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक महिला पुलिसकर्मी सलमा सैयद काफी वायरल हो रही है। आपको बता दें कि महिला कांस्टेबल महाराष्ट्र के हिंगोली में  कांस्टेबल के पद पर तैनात है जो अपने एक काम से काफी चर्चाओं में हैं. पूरा देश और स्वास्थ्य विभाग समेत उनका विभाग खुद उन्हें सलाम कर रहा है। कइयों की आंखें नम भी हुई।

आपको बता दें कि 29 साल की सलमा सैयद को हिंगोली शहर के बस स्टैंड पर 16 जनवरी को सुबह 10 बजे बेंच पर एक बच्चा रोता बिलखता मिली।  किसी ने बस स्टैंड में नवजात शिशु को छोड़ दिया था जिसकी रोने की आवाज सबको सुनाई दे रही थी लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। तुरंत बस स्टैंड के कुछ कर्मचारी वहां पहुंचे और पूछताछ केंद्र से लाउड स्पीकर पर कई बार बच्चे के बारे में घोषणा की गई लेकिन उसे लेने कोई नहीं पहुंचा. नवजात की उम्र 3 महीने बताई गई। बच्चे का रोना लगातार जारी था। लाख जानने पर भी पता नहीं चल पाया कि ये बच्चा कौन लावारिस छोड़ गया।

वहीं तभी महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल के अधिकारियों ने बच्चे की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने बच्चे को सिविल अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल ले जाने के बाद भी नवजात का रोना बंद नहीं हो रहा था। डॉक्टर नर्स स्वास्थ्य कर्मचारी सभी ने मिलकर बच्चे को पाउडर का दूध देने की भरपूर कोशिश की लेकिन बच्चे ने वह नहीं पिया. बच्चे की ये स्थिति देखकर सिविल अस्पताल के चीफ डॉक्टर ने जच्चा-बच्चा वॉर्ड में भर्ती महिलाओं से बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराने की अपील की लेकिन किसी ने हामी नहीं भरी। कोरोना के कहर को देखते हुए कोई बच्चे को दूध पिलाने को राजी नहीं हुआ।

तभी सिविल अस्पताल में ड्यूटी में तैनात कांस्टेबल सलमा सैयद बच्चे को रोता देख दिल पसीज गया। सलमा ने चीफ डॉक्टर से कहा कि उसकी दो साल की बेटी है, जिसे वो अभी भी ब्रेस्ट फीडिंग कराती है। अगर वो इजाजत दें तो वो बच्चे को दूध पिला सकती है. बस फिर क्या था डॉक्टर ने तुरंत इजाजत दे दी। सलमा ने बच्चे को गोद में लिया फीडिंग रूम में दूध पिलाया. ऐसा करते ही बच्चे का रोना बंद हो गया. अस्पताल में उस दौरान वहां मौजूद सभी लोगों की सांस में सांस आई। हर किसी की आंखे नम हो गई। अब इस घटना को तीन दिन हो गए हैं. लेकिन सलमा दिन में तीन बार इस शिशु को अपना ही समझ कर फीडिंग करा रही हैं. अस्पताल में ड्यूटी पर रहते वक्त दो बार वो ऐसा करती हैं. ड्यूटी खत्म होने के बाद वो घर जाकर वहां का सारा काम करती हैं. उनकी अपनी बेटी के अलावा एक चार साल का बेटा भी है. पति कॉन्ट्रेक्ट पर काम करते हैं. घर का सारा काम खत्म होने के बाद रात को दस बजे वो एक बार फिर अस्पताल आकर बच्चे को दूध पिलाती हैं.

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