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Joshimath : जोशीमठ में अभी भी नहीं भरीं दरारें, मानसून की दस्तक के साथ बढ़ी चिंता

जोशीमठ में भूधंसाव के कारण आई दरारें अभी भी नहीं भरी हैं। ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त ना होने के कारण अभी भी पहाड़ के अंदर पानी जाने से खतरा लगातार बना हुआ है। मानसून की दस्तक के साथ ही ये खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। प्री-मानसून की बारिश ने ही लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

जोशीमठ में अभी भी नहीं भरीं दरारें

बीते साल जनवरी में जोशीमठ में दरारें आईं थी और कुछ ही दिनों इन दरारों से पानी भी निकलने लगा था। जिसने देश ही नहीं पूरी दुनिया का ध्यान जोशीमठ की ओर खींचा था। एक साल से भी ज्यादा का समय बीते जाने के बाद भी ये दरारें अभी भी भरीं नहीं है। बारिश के पानी के पहाड़ के भीतर समाने से अभी भी खतरा बना हुआ है।

एक साल बीता लेकिन स्थानीय अब भी नाखुश

जहां एक ओर बारिश के पानी के पहाड़ में समाने से चिंता है तो वहीं दूसरी ओर जोशीमठ में 14 पॉकेट ऐसे हैं जहां खड़े 800 से ज्यादा जर्जर भवन हैं जो कि पहाड़ पर भार बने हुए हैं। एक साल से भी ज्यादा का समय गुजर जाने के बाद भी पहाड़ की स्थिरता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जिस कारण स्थानीय अब भी नाखुश हैं। मानसून की बारिश के साथ ही अब एक बार फिर उन्हें चिंता सताने लगी है।

नौ वार्डों में 868 निर्माणों में आईं थी दरारें

बता दें कि जोशीमठ में भू-धंसाव के कारण घरों में दरारें आने के कारण कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। 4 जनवरी 2023 को जोशीमठ के मारवाड़ी इलाके में जमीन से पानी फूटने के बाद शहर के कई हिस्सों में दरारें बढ़ गई थी।

उदय फाउंडेशन की जनवरी 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक जोशीमठ के नौ वार्डों में 868 निर्माणों में दरारें आ गईं, जबकि 181 इमारतों को असुरक्षित माना गया। रिपोर्ट के अनुसार एक साल बाद भी एक दर्जन से ज्यादा परिवार जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय होटलों, गेस्ट हाउस और लॉज में बनाए गए राहत शिविरों में हैं।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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