
19 मार्च से चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) की शुरुआत हो रही है। ऐसे में पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इन दिन देवी दुर्गा का आह्वान कर उन्हें अपने घर पर बुलाया जाता है। हालांकि इस दौरान आपको सही विधि और नियमों का पालन करना पड़ता है। तभी आपकी पूजा सफल होती है। ऐसे में चलिए जानते है इसकी सही विधि।
Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Niyam: घट स्थापना की सही विधि
- नवरात्र के पहले दिन सुबह जल्दी उठे।
- माता का ध्यान करें।
- घट स्थापना वाले स्थान की साफ-सफाई करें।
- सफाई के बाद गंगाजल का छिड़काव कर करें।
- घट स्थापना के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा उत्तम रहती है
- उस स्थान पर हल्दी से अष्टदल बनाएं।
- तांबे/ मिट्टी के कलश में शुद्ध जल और थोड़ा गंगाजल डालें।
- कलश में सिक्का, सुपारी, साबुत हल्दी की गांठ, दूर्वा और अक्षत डालें।
- कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली भी बांधे।
- कलश के मुख पर 5य 7 आम के पत्ते रखें।
- नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर इसको कलश के ऊपर रखें।
- कलश को लकड़ी की चौकी (पाटा) में रखें।
- चौकी पर लाल/पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
- एक जगह साफ मिट्टी में जौ बोएं।
- सबसे पहले गणेश जी को ध्यान करें।
- इसके बाद माता रानी की पूजा करें।
- अखंड ज्योत करते है तो वो जलाएं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- कलश स्थापना के स्वयं अपने मन को पूरी तरह शुद्ध रखें।
- मन में नकारात्मक विचार न लाएं।
- अगर अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को सूना छोड़कर ना जाएं।
- नवरात्र के दौरान क्रोध, अपशब्द या किसी का भी अपमान करने से बचें।