उत्तराखंड: आप के 6 प्रत्याशी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले, पार्टी ने सबसे पहले दी जानकारी

देहरादून: चुनाव आयोग के नए नियम के अनुसार अगर किसी पार्टी ने किसी आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को प्रत्याशी बनाया है, तो उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसी नियम का पालन करते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों की सूचना सार्वजनिक की है। यह सूचना आप ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी की है। आयोग के निर्देशों के तहत आप ने इन प्रत्याशियों के चयन की वजह भी बताई है।

आम आदमी पार्टी की ओर से सोशल मीडिया में जारी सूचना के अनुसार चमोली की थराली सीट से प्रत्याशी गुड्डू राम पर 2021 से चल रहे मुकदमे की जानकारी देते हुए घाट आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका को चयन की मुख्य वजह बताया है। देहरादून कैंट में रविंद्र सिंह आनंद पर 2017 में दर्ज केस की जानकारी भी उजागर की है। इसकी वजह यह बताई है कि वह किसान हैं और गरीब बेटियों की शादियां कराते हैं।

जनता के बीच उन्हें अच्छा काम जारी रखने के लिए टिकट दिया गया है। पौड़ी सीट पर मनोहर लाल पहाड़ी पर 2017 में केस दर्ज हुआ था। हालांकि यह केस आरपी एक्ट में दर्ज है। पौड़ी की कोटद्वार सीट से प्रत्याशी अरविंद कुमार पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे की जानकारी देते हुए पार्टी का कहना है कि कोविड-19 महामारी में जनता के बीच काम करने के दौरान उन पर यह केस दर्ज हुआ है।

वहीं, नैनीताल की रामनगर सीट पर प्रत्याशी शिशुपाल सिंह रावत पर दर्ज मुकदमे की जानकारी दी गई है, जिसमें बताया गया है कि इस पर स्टे है। उनके चयन की वजह यह बताई गई है कि वह स्कूल संचालित करते हैं, जिसमें वंचित वर्ग के बच्चों को वह निशुल्क शिक्षा देते हैं। काशीपुर में दीपक बाली पर दर्ज मुकदमें की जानकारी देते हुए आप ने कहा है कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम कर रहे हैं, इस वजह से उन्हें चुना गया है। उनके मुकाबले में पार्टी को कोई प्रत्याशी नहीं मिला।

ये है नए नियम
प्रत्याशी के लिए रू चुनाव प्रचार अभियान के दौरान प्रत्याशी को तीन बार अपनी क्रिमिनल केस की जानकारी न्यूज पेपर और टीवी के माध्यम से प्रसारित करनी होगी। प्रत्याशी को नाम वापसी की अंतिम तिथि के अंतिम चार दिनों में जानकारी जारी करनी होगी। इसके बाद अगले पांच से आठ दिन में दोबारा और फिर चुनाव प्रचार के नौंवे दिन से प्रचार के अंतिम दिन तक।

राजनीतिक दलों को अपने सभी प्रत्याशियों की आपराधिक पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी वेबसाइट, सोशल मीडिया व समाचार पत्रों में जारी करनी होगी। दलों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी को क्यों चुना? यह भी बताना होगा कि उन्हें अन्य कोई ऐसा व्यक्ति क्यों नहीं मिला, जो कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाला न हो।

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