कोरोना ने पिता को छीना, फिर बेटे ने बनवाया ऐसा स्टैच्यू, लगता है वो साथ हैं

कोरोना काल में कइयों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। किसने पिता खोया तो किसी ने मां, किसी ने पत्नी खोई तो किसी ने बेटा-बेटी, किसी ने पति खोया तो किसी ने बहन…कोरोना काल में चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था। बता दें कि इस कोरोना काल में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना का कहर बरपा…एक दिन में लाख से भी ज्यादा मामले सामने आए। वहीं इस काल में एक बेटे ने अपने पिता को खोया और उनकी याद में घर में ऐसा स्टैच्यू बनवाया कि उसको पिता की कमी महसूस कम होती है।

जी हां बता दें कि सांगली जिले में रहने वाले अरुण कोरे ने पिछले साल कोरोना काल में अपने पिता को खोया जो की इंस्पेक्टर थे। पिता को हमेशा अपने पास रखने और सम्मान के रुप में बेटे ने सिलिकॉन का स्टैच्यू घर में बनवाया। स्टैच्यू ऐसा बनवाया कि कोई कह नहीं सकता कि ये सिर्फ एक स्टैच्यू है। कोई अगर झलक से देखे तो ऐसा लगेगा मानो कोई इंसान ही बैठा हो। आपको बता दें कि ये महाराष्ट्र का पहला सिलिकॉन स्टैच्यू है।

आपको बता दें कि संगली के 32 साल के अरुण कोरे ने 6 सितंबर, 2020 को अपने पिता रावसाहेब शामराव कोरे को खोया। जिनकी उम्र 55 साल थी। अरुण ने बताया कि पिता की मौत से पूरा परिवार सदमे में थे। उनकी बहुत याद आती थी। बताया कि एक दिन वो यूट्यूब पर मैं वीडियो देख रहे थे जिसमें कर्नाटक का एक व्यापारी पत्नी के निधन के बाद उसका स्टैच्यू बनवाता है। फिर उसने भी वहीं प्लान बनाया और पिता को अमर कर दिया। अरुण ने अपने दोस्त को फोन किया और बेंगलुरु के एक आर्टिस्ट का नंबर मिला। उसने दो महीने के भीतर स्टैच्यू तैयार कर दिया।

अरुण का कहना है कि जब को स्टैच्यू लेने गए तो हैरान रह गए ऐसा लगा कि पापा मेरे सामने हैं। ऐसा लगा ही नहीं कि वो हमारे बीच नहीं हैं। ये सिर्फ हिल और बोल नहीं सकता लेकिन ऐसा लगता है मानों पापा बैठे हों। आपको बता दें कि अरुण का परिवार सांगली में पुलिस कॉलोनी के पास एक बंगले में रहता है। उन्होंने घर में एक छोटा सा संग्रहालय बनाया है, जिसमें रावसाहेब का सारा सामान जैसे वर्दी, पदक और पुरस्कार आदि को रखा गया है।

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