हरदा बोले : टनल खोलने में 4 दिन बाद भी सरकार नाकाम, दुख के समय CM लोकार्पण में व्यस्त

देहरादून : टनल को खोलने का काम जारी था लेकिन अचनाक अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से रेस्क्यू रोक दिया गया है। टीम को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। लापता लोगों के परिजन परेशान हैं और टनल खोलने पर ही नजर बनाए हुए हैं। चमोली पहुंचीं राज्यपाल के सामने भी लापता लोगों के परिजन फूट-फूट कर रोए। वहीं राज्यपाल ने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द रेस्क्यू कर लोगों को बाहन निकाला जाएगा। आपको बता दें कि टनल में 35 से 40 लोगों के फंसे होंने की आशंका है। वहीं आज रेस्क्यू का 4था दिन है लेकिन टनल के अंतिम छोर तक नहीं पहुंचा जा सका है जिसमे हरदा ने वार किया है और सरकार को आड़े हाथ लिया है।

हरदा का वार

हरदा ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर वार करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री जी, इस आपदा व रेस्क्यू ऑपरेशन में आप समस्त राज्य के नेता हैं, क्या आपके मन में यह सवाल नहीं उठ रहा है कि सारी आधुनिकतम तकनीक और केंद्रीय मदद उपलब्ध होने के बावजूद भी आज 4 दिन बाद भी हम टनल के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाये हैं! हम टनल में ऑक्सीजन पंप नहीं कर पाए हैं और दूसरे ऐसे उपाय नहीं कर पाये हैं जिससे टनल में फंसे हुये लोगों के जीवित बचने की संभावना बढ़ जाय। प्रभावित परिवारों व क्षेत्रों तक खाद्य सामग्री आदि पहुंचाने के लिए क्या किसी तकनीक की आवश्यकता है? जो दु:खी परिवार अपने प्रियजनों को खोजने के लिए आ रहे हैं, उनके आंसू पोछने का दायित्व भी तो हमारा ही है न, कोई सूचना तंत्र वहां विद्यमान नहीं है, आप शिलापट दर शिलापट का लोकार्पण कर रहे हैं, आपदा की इस घड़ी में हम बचाव कैसे कर रहे हैं, कैसा समन्वय रख रहे हैं, सूचना तंत्र हमारा कितना प्रभावी है, लोगों तक सहायता पहुंचाने में हम कितने तत्पर हैं, इसी से तो हमारी उत्तराखंड की पहचान मजबूत होगी। मैं, इस तथ्य के बावजूद कि हमने ग्लेशियर के स्वभाव को समझने में चूक की। मैं, इस आपदा के लिए किसी को दोष देने के बजाय आगे की तरफ देखना चाहूंगा और हम कोई गहरी सीख ले सकें यह हम सबका सामूहिक कर्तव्य है। मुख्यमंत्री के नाते इस दिशा में भी आपको ही पहल करनी होगी। टनल में कार्यरत उपकरणों को लेकर अपने मन की आशंका मैंने तपोवन से ही माननीय मुख्य सचिव को बता दी थी।

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