बड़ी खबर : RT-PCR में रिपोर्ट निगेटिव आने पर कोरोना ना होने की गारंटी नहीं, इस मामले से सब हैरान..पढ़िए

कोरोना की दूसरी लहर पहले से ज्यादा घातक साबित हो रही है। बीते 24 घंटे में 2 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं वहीं 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं इस बीच कई लोग आरटी-पीसीआर टेस्ट करवा रहे हैं जिसकी रिपोर्ट एक दो दिन में मिल जाती है। लेकिन इसको लेकर चौकाने वाला खुलासा हुआ है। जी हां दावा किया गया है कि आरटीपीसीआऱ टेस्ट धोखा दे सकता है। रिपोर्ट निगेटिव आती है और मरीज में कोरोना के लक्षण होते हैं। ऐसे में मरीज में कोरोना की पहचान के लिए दूसरे टेस्ट करने पड़ रहे हैं। साथ ही अब कोरोना के लक्षण में भी बदलाव आ रहा है।हाल ही में एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित विधायक की पत्नी ने निजी लैब से RTPCR टेस्ट करवाया। रिपोर्ट नेगेटिव निकली। लेकिन, CT SCAN में कोविड न्यूमोनिया की पुष्टि हुई। इसके बाद विधाायक पत्नी को इलाज के लिए दून अस्प्ताल में भर्ती कर दिया गया। उनकी अब दोबारा RTPCR जांच होगी।

बता दें कि RT-PCR से कोरोना की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इसको लेकर सीटी-स्कैन और ब्रोंकोस्कोपी करनी पड़ रही है। तब जाकर वायरस की पहचान हो पा रही है, ऐसे मरीजों की तादाद इस बार ज्यादा है।

नाक और गले से नहीं आ रहा पकड़ में
दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के सूत्रों की मानें तो पहले गला और नाक ये दो अंग थे, जिनसे कोरोना को पकड़ रहे थे। अब वहां से पकड़ में नहीं आ रहा। सीटी स्कैन से पकड़ में आ रहा है। पहले ये ग्रोथ में 7 से 10 दिन लगाता था। अब कई मामले में RT-PCR निगेटिव है लेकिन तीसरे ही दिन सीटी स्कैन में कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं। अब ऐसे कई मरीज साने आ रहे हैं जिनके लक्षण कोविड के होते हैं पर टेस्ट में नेगेटिव होते हैं। लक्षण कोविड का दिखता है तो 4-5 दिन ऑब्जर्व करने के बाद अगला कदम पहले छाती का सीटी-स्कैन करने का उठाया जा रहा है। इसके साथ ही सांस की नली में ट्यूब डालकर (ब्रोंकोस्कोपी) की जा रही है और फेफड़ों से फ्लूड लिया जा रहा है। जो सामान्य तौर पर नाक से लेने पर सैंपल नेगेटिव आ रहा था, इस विधि से पॉजिटिव आ रहा है।

लक्षण में भी दिख रहे बदलाव
इस बार कोरोना में नए लक्षण भी दिख रहे हैं। कोरोना के मरीजों में लूज मोशन, डायरिया भी मिल रहा है। शुरुवाती दिनों में कोरोना के मरीज को सूखी खांसी की शिकायत रहती थी, अब बलगम भी आ रहा है। सूंघने की समस्या पिछली बार ज्यादा थी। इस बार कम है। पहले इनक्यूबेशन पीरियड 3-7 दिन था। अब 1 से 3 दिन है। 1 से 3 दिनों में तेजी से निमोनिया फैलता है।

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