उत्तराखंड: क्या फिर बगावत करेंगे हरक, इस बार कौन-कौन देगा साथ!

देहरादून: हरक सिंह की नाराजगी के चर्चे जोरों पर हैं। शुक्रवार देर शाम को हुई कैबिनेट में हरक सिंह कोटद्वार मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव नहीं आने से नाराज हो गए थे। कैबिनेट बैठक छोड़कर जाते वक्त हरक सिंह रावत ने कहा था कि ऐसे मंत्री पद का क्या करना है, जो अपने लोगों से किया एक वादा भी पूरा ना कर सके। हरक सिंह रावत को मना लेने के दावे भी भाजपा की ओर से किए जा रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वो अभी मानें नहीं हैं। हरक बात पर अडिग हैं और उनको अन्य विधायकों का भी समर्थन हासिल है।

हरक सिंह रावत बगावती तेवरों के लिए जाने जाते हैं। छात्र राजनीति से लेकर आज तक के सफर में हरक सिंह रावत कई बार बगावत कर चुके हैं। दल बदल भी उनके लिए नई बात नहीं है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरूआत करने वाले हरक सिंह रावत हाथी पर भी सवार रह चुके हैं। यूपी में भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती थी।

उसके बाद उन्होंने हाथ थामा लिया और लंबे समय तक थामे रहे। केदारनाथ आपदा के बाद कांग्रेस के तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा को हटाकर जब हरीश रावत को सीएम बनाया गया। 2016 में हरक की हरीश रावत से ठन गई। ऐसी ठनी कि उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी और सरकार को भी गिरा दिया। ये बात अलग है कि हरीश रावत अपनी सरकार को बहाल कराने में सफल हो गए थे।

हरक के साथ उस वक्त नौ विधायकों ने भी कांग्रेस से बगावत कर ली थी। उनमें से यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य कांग्रेस में घर वापसी कर चुके हैं। अब एक बार फिर हरक बगवात को तैयार हैं। चुनाव से पहले हरक की ये बगावत क्या रंग दिखाएगी, यह कह पाना फिलहाल मुश्किल है, लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव में कांग्रेस इसका लाभ जरूर उठा सकती है।

सोशल मीडिया और लोगों के बीच इस तरह की चर्चाएं भी तैरने लगी हैं कि क्या इस बार भी हरक सिंह रावत बगावत करेंगे? अगर वो बगावत करते हैं तो उनके याथ कौन-कौन विधायक भाजपा छोड़ेगा? बड़ा सवाल यह भी है कि अगर हरक बगावती तेवर जारी रखते हैं और पार्टी छोड़ देते हैं, फिर उनका अगला कदम क्या होगा? क्या हरक फिर से कांग्रेस ज्वाइन करेंगे या कोई दूसरा रुख अख्तियार करेंगे।

जिस तरह से राजनीति के लिए कहा जाता है कि वहां ना कोई दुश्मन है और ना कोई सगा। जब जिसको जहां मौका मिलता है, वो अपने फायदे के लिए वहीं ठिकाना बना लेता है। हरक सिंह रावत के बारे में भी यह कह पाना कठिन है कि वो क्या कदम उठाएंगे? तब तक कुछ कहना जल्दबाजी होगी, जब तक हरक खुद ऐलान नहीं कर देते।

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