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क्या होता है एंजल टैक्स? जिसे वित्त मंत्री ने किया खत्म, पहले क्यों होता था वसूल, पढ़ें यहां

वित्त मंत्री ने संसद में 23 जुलाई को बजट पेश किया। यह बजट चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए है। इस बजट में सभी सेक्टर के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। इन ऐलानों में से एक एंजल टैक्स भी है। इस एंजल टैक्स को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर एंजल टैक्स क्या होता है और इसे पूरी तरह से खत्म क्यों किया गया है। इससे आम जनता पर क्या असर पड़ेगा। आइये जानते हैं इन सवालों के जवाब।

क्या होता है एंजल टैक्स?

साल 2012 में एंजल टैक्स लागू किया गया था। यह टैक्स उन अनलिस्टेड बिजनेस पर लगाया जाता है जो एंजल निवेशकों से फंडिंग लेता है। यानि किसी भी स्टार्टअप को शुरु करने के लिए कंपनी को फंड की जरुरत होती है। ऐसे में कई बार स्टार्टअप एंडल निवेशकों से फंडिंग लेते हैं। चूंकि, वह एंडल निवेशकों से फंडिंग लेते हैं जिसके लिए उन्हें टैक्स देना होता है, इस टैक्स को ही एंजल टैक्स कहते हैं। इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 56 (2) (vii) (b) के तहत एंजल टैक्स लिया जाता है।

क्यों वसूला जाता था एंजल टैक्स

बता दें कि सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने के लिए एंजल टैक्स वूसलना शुरु किया था। इसके अलावा सरकार ने सभी बिजनेस को इनकम टैक्स के दायरे में लाने के लिए भी इस टैक्स को शुरु किया था। हालांकि, सरकार के इस कदम से स्टार्टअप को परेशानी का सामना करना पड़ा था। स्टार्टअप को तब दिक्कत होती है जब निवेश राशि से ज्यादा फेयर मार्केट वैल्यू होता है। ऐसी स्थिति में स्टार्टअप को 30.09 फीसदी तक का टैक्स देना पड़ता है।

एंजल टैक्स अब खत्म

हालांकि अब वित्त मंत्री ने एंजल टैक्स को खत्म कर दिया है। इससे स्टार्टअप को फायदा होगा। दरअसल, सरकार का फोकस स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी लाना है। ऐसे में स्टार्टअप्स की बढ़ोतरी के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है। 

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