4 दिनों में चार बड़ी घटना!, उत्तराखंड में चल रहा मौत का खेल

uttrakhand mein guldar ka aatank: कुमाऊं में बढ़ते गुलदार के आतंक ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। राज्य में बीते चार दिनों में गुलदार के हमले से चार मौते हुई हैं जिसने वन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
55 साल की हंसी देवी को गुलदार ने बनाया निशाना uttrakhand mein guldar ka aatank
दरअसल 3 अप्रैल की सुबह नैनीताल के सूर्या गांव में 55 साल की हंसी देवी हमेशा की तरह जंगल में घास लेने गई थी और तभी झाडियों के पीछे घात लगाए गुलदार ने उनपर हमला कर दिया। हंसी देवी जब दोपहर तक घर नहीं लौटी तो उनके पति और गांव वाले उन्हें ढूंढने गए जहां जंगल में उन्हें हंसी देवी के फटे कपड़े मिले। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। सुबह हंसी देवी का शव जंगल से 2 किमी दूर झाड़ियों में मिला।
उत्तराखंड में चल रहा मौत का खेल, वन विभाग फेल!
हैरत की बात ये है कि जिस सिस्टम को लोगों की हिफाजत करनी चाहिए, वो उस वक्त नदारद था। गांव के लोग खुद हंसी देवी को कपड़े में लपेटकर गांव तक लाए। अभी हाल ही में नैनीताल में एक और शख्स को गुलदार ने अपना शिकार बनाया था वो दिल दहला देने वाली तस्वीरें आपने सोशल मीडिया में देखी ही होंगी। पिछले 4 दिनों में उत्तराखंड में हुई ये चौथी बड़ी घटना है।
4 दिनों में उत्तराखंड में चार बड़ी घटना
- पौड़ी गढ़वाल में एक 4 साल की मासूम बच्ची गुलदार का शिकार बनी।
- खटीमा रेंज में एक महिला पर जानलेवा हमला हुआ।
- अल्मोड़ा में एक शख्स की जान गई और
- भीमताल में हंसी देवी।
जंगलों पर निर्भर है पहाड़ के लोग
पहाड़ों की बात करें तो वन्यजीवों और पहाड़ के लोगों का रिश्ता बहुत पुराना है। पहाड़ों के लोग हर छोटी बड़ी चीज को लेकर जंगलों पर निर्भर होते हैं फिर चाहे वो उनके मवेशियों के लिए घास लाना हो। शाम का खाना बनाने के लिए लकड़ी लाना हो
या कुछ और इसके अलावा पहाड़ों में रास्ते भी जंगलों से होकर ही गुजरते हैं।
ऐसे में इन वन्य जीवों का इंसानों से आमना सामना होते रहते है। कई बार आपने भी ऐसी कहानीयां सुनी होंगी अपने बड़े बुजुर्गों से जो बताते हैं की हमारा सामना कभी किसी गुलदार से बाघ से या फिर भालू से हुआ हो। उस वक्त ये वन्यजीव इतने घातक नहीं हुआ करते थे।
शहरों की गलियों में आकर लोगों पर हो रहे हमले
पिछले कुछ सालों से हमारे और इन वन्यजीवों के रिश्ते में ऐसी दरार आ गई है जिसे अब शायद ही कभी भरा जा सकेगा। अब ये वन्यजीव गांव घरों यहां तक की शहरों की गलियों में आकर तक लोगों पर हमला कर रहे हैं। हर साल मानव वन्य जीव संघर्ष में कई लोग मारे जाते हैं और दिन पर दिन ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। वैसे इसके पीछे कई सारी वजह हैं उस बारे में फिर कभी बात करेंगे।
लोग अपने घरों से बाहर निकालने में डर रहे
फिलहाल उत्तराखंड में ऐसा माहौल है की लोग अपने घर स बाहर निकालने में डर रहे हैं। वहीं वन विभाग हमेशा की तरह अपना राग अलाप रही है कि इलाके में कैमरे लगाए जा रहे हैं, पिजरे फिट कराए जा रहे हैं, गश्त बढ़ा दी गई है। हलांकि इस सबके बाद जो हो रहा है उसका नतीजा आपके सामने हैं।
स्थानीय लोग मानव वन्यजीव संघर्ष पर लगाम लगाने के लिए किसी ठोस और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। वैसे इन हो रहे हमलों का जिम्मेदार सिर्फ वन विभाग ही नहीं है इस बढ़ते मानव वन्यजीव संघर्ष के जिम्मेदार कहीं ना कहीं हम भी हैं।