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उत्तरांचल बॉयो मेडिकल कॉलेज ने फीस के लिए बंद की छात्रों की ऑनलाइन क्लास

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उत्तराखंड में सैकड़ों परिवार इस समय ऐसे हालात में है जहां अपने बच्चों की फीस जमा करना उनके लिए भारी पड़ रहा है लेकिन कॉलेज अपनी फीस में एक दिन की भी देरी के लिए इजाजत नहीं दे रहें हैं। ऐसा ही एक मामला देहरादून के उत्तरांचल कॉलेज ऑफ बायो मेडिकल साइंसेज में सामने आया है। ये कॉलेज अपने छात्रों पर फीस का दबाव तो बना ही रहा है बल्कि फीस दे पाने में अक्षम छात्रों को ऑनलाइन क्लासेज से हटा भी दिया जा रहा है।

दरअसल आपकी प्रिय न्यूज वेबसाइट khabaruttarakhand.com को उसके एक पाठक ने कॉलेज प्रबंधन के इस तरह से व्यवहार के बारे में सूचना दी। सूचना देने वाले के अनुसार देहरादून के ट्रांस्पोर्ट नगर इलाके में बने उत्तरांचल कॉलेज ऑफ बायो मेडिकल साइंसेज में पढ़ने वाले छात्रों पर इस समय कॉलेज प्रबंधन उत्पीड़न करने में लगा हुआ है। कॉलेज प्रबंधन छात्रों से फीस के लिए दबाव बना रहा है। हालात ये हैं कि कोरोना महामारी के इस दौर में भी छात्रों से फीस समय पर चुकाने के लिए उन्हें फोन कर दबाव दिया जा रहा है। फीस में देरी होने पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। यही नहीं, कॉलेज प्रबंधन ने फीस में देरी कर रहे छात्रों को ऑनलाइन क्लास की एक्सेस देना बंद कर दिया है। अब ऐसे बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहें हैं।

इस सूचना के बाद हमारे संवाददाता ने कॉलेज प्रबंधन से सच जानने के लिए फोन किया। हमने कॉलेज के एमडी जीडीएस बर्ने को फोन किया तो उन्होंने भी ये बात स्वीकारी की कॉलेज ने फीस जमा न करने वाले छात्रों की ऑनलाईन पढ़ाई बंद करने का फैसला लिया है। हालांकि कॉलेज के एमडी आर्थिक तंगी का हवाला भी देने लगे। कॉलेज के एमडी की माने तो जब छात्र की फीस जमा नहीं करेंगे तो फिर स्टॉफ को सेलरी कैसे देंगे? लेकिन जब हमने उनसे सवाल किया कि हो सकता है कि कई अभिभावकों के पास इस समय फीस जमा करने के लिए पैसे न हो तो? ऐसे में एमडी साहब की माने तो कॉलेज में कई ऐेसे छात्र भी हैं जो काफी गरीब भी हैं, वो अगर फीस जमा नहीं कर पा रहें हैं तो उसकी वजह बता दें। यदि किसी अभिभावक की नौकरी चली गई तो वह उसका प्रमाण दें। एमडी ने ये भी कहा कि जिन बच्चों के अभिभावक सरकारी नौकरी पर हैं वह तो फीस जमा कर दें क्योंकि कई ऐसे अभिभावक है जो सरकारी नौकरी में होने के बावजूद फीस जमा नहीं कर रहें हैं।

अब ऐसे में कैसे हल निकलेगा इसका रास्ता सरकार को ही निकालना है,क्योंकि जो सरकारी कर्मचारी यदि वेतन ले रहा है और अपने बच्चों की फीस जमा नहीं कर रहा है वह भी गलत है,जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है,और छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इसलिए इस दिशा में सरकार को कदम उठाने की जरूरत है,यदि कोई फीस जमा वास्वत में आर्थिक तंगी की वजह से नहीं उठा रहा है तो उसे कैसे राहत दी जा सकती है। और जो स्कूल फीस जमा करने के लिए दवाब बनाकर पढ़ाई रोक दे रहें है,उन पर क्या कार्रवाई की जाएं। क्योकि महामारी किसी के कैरियर पर बोझ न बन जाएं इस दिशा में भी सोचा जाना चाहिए।

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