उत्तराखंड में नदियों को जोड़ने की योजना, मंथन में चर्चा

nitesh jha iasसशक्त उत्तराखंड@25 चिंतन शिविर में पेयजल सचिव नितेश कुमार झा ने नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेन्ट पर अपना प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि अभी राज्य में देहरादून और हरिद्वार दो ऐसे जनपद हैं जहां पानी की सर्वाधिक आवश्यकता है। जिसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि समूचे राज्य में हमें पेयजल को लेकर वृहद स्तर पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इसके लिए आने वाले दिनों में ग्राम सभाओं का स्थापना दिवस मनाने की तैयारी की जा रही है। इसके पीछे मंतव्य यही है कि इस दिवस पर ऐसे सक्षम लोग वहां पहुँचे जो स्थानीय नाले, खालों और तालाबों को गोद ले सकें। इसके अतिरिक्त वृहद पौधरोपण किया जाए ताकि जल संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि जो पेयजल ज्यादा खर्च करते हैं उनके बीच स्कूली बच्चों के माध्यम से जागरूकता लाई जाए।

वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने वाली यूनिटों को सब्सिडी दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस बात पर बल दिया गया कि एक वाटर ऑपरेटिव बोर्ड बनाया जाए जिसमें इनसे संबंधित विभागों को शामिल किया जाए ताकि योजनाओं में एकरूपता आ सकेगी। सचिव पेयजल ने ग्लेशियर से निकलने वाली पिंडर जैसी नदी से कोसी, गोमती जैसी सूख रही नदियों को पुनर्जीवित करने की बात कही। इसके लिए पिंडर के पानी को चैनल कर कोसी, सरयू, गोमती आदि तक पहुँचाया जाए। ऐसा देश में पहली बार करने पर विचार किया जा रहा है।

इस दौरान बताया गया कि जल्द वाटर बॉटलिंग प्लांट की नीति भी लाने की तैयारी की जा रही है। वहीं, पानी की जांच स्वतः कराने पर बिल में छूट देने के प्रावधान पर भी कार्य किया जा रहे हैं। इससे हम पानी की गुणवत्ता पर फोकस कर सकेंगे। प्रस्तुतिकरण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पौड़ी निवासी सचिदानंद भारती की सक्सेस स्टोरी दिखाने के साथ ही टुंडा चौरा गांव अल्मोड़ा में कैसे वहां स्थानीय निवासियों ने सारे नाले धारों को रिचार्ज करने का काम किया इस पर भी प्रस्तुतिकरण दिया गया।

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