अभी और सताएगा बिजली का संकट, जल्द नहीं मिलने वाली राहत

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उत्तराखंड में मौजूदा बिजली संकट जल्द होता हुआ हुआ नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि लगभग एक हफ्ते का समय और लगेगा तब कहीं जाकर बिजली संकट से राहत मिलने की उम्मीद है।

हालांकि जो हालात हैं उनमें कई जानकार बता रहें हैं कि राज्य में बिजली संकट से छुटकामा मिलने में एक महीने तक का समय लग सकता है।

उत्तराखंड में बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद यूपीसीएल ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है। अधिकारियों ने अन्य राज्यों से बिजली लेकर संकट को दूर करने का प्रयास किया है।

हो रही है कटौती

मौजूदा समय में ग्रामीण इलाकों में छह से सात घंटों तक की कटौती करनी पड़ रही है। इससे कृषि का काम बाधित हो रहा है। वहीं राज्य के अलग अलग सिडकुल में भी बिजली कटौती की जा रही है। हालात ये हैं कि उद्योगों को बिजली कटौती से उत्पादन में कमी दर्ज की गई है। इससे व्यापारियों में खासी नाराजगी है।

वहीं यूपीसीएल के अधिकारी दावा कर रहें हैं कि वो एक हफ्ते में हालात संभाल लेंगे। बिजली संकट को बहुत हद तक दूर कर लिया जाएगा। हालांकि इस दावे के आधार पर वो बहुत कुछ कहने की स्थिती में नहीं हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि राज्य में बिजली संकट अब बादलों के भरोसे है। बारिश से पहले हालात सुधरेंगे ऐसा कहना मुश्किल है।

आने वाले दिनों में बिजली की मांग में इजाफा होने की उम्मीद है। मई के महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है। चार धाम यात्रा भी चल रही होती है। ऐसे में यात्रा मार्गों और धामों में भी बिजली की मांग बढ़ जाती है। गर्मी के चलते घरों में चलने वाले एसी और अन्य कूलिंग एक्विपमेंट्स के चलते भी बिजली की खपत बढ़ जाती है।

वहीं बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में बिजली की सालाना डिमांड 2468 मेगावाट है। राज्य की अलग अलग परियोजनाओं से कुल 5211 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। इसमें से उत्तराखंड के कोटे में 1320 मेगावाट बिजली ही आ रही है।

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