नए चेहरों पर दाव खेलेगी कांग्रेस, क्या गढ़वाल मंडल में होगी वापसी ?

उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल मंडल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राज्य की सत्ता का रास्ता काफी हद तक गढ़वाल की राजनीतिक दिशा से तय होता है। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही चुनावी रणनीति में गढ़वाल को केंद्र में रखती हैं और 2027 चुनाव के लिए भी दोनों पार्टियों ने खास रणनीति बनाई है ।
गढ़वाल मंडल में 29 सीटों पर बीजेपी काबिज
क्या इस बार कांग्रेस गढ़वाल में वापसी कर पाएगी या फिर इस बार भी गढ़वाल की सीटों पर बीजेपी राज करेगी। ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल मंडल हमेशा से ही सत्ता की दिशा तय करने वाला क्षेत्र माना जाता है। 41 विधानसभा सीटों वाले गढ़वाल मंडल में 29 सीटों पर बीजेपी काबिज है।
गढ़वाल क्षेत्र में कांग्रेस प्रभारी की बैठकें
वहीं 8 सीटों पर कांग्रेस है। इसके अलावा 4 सीटें निर्दलीयों के खाते में हैं। ऐसे में 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने गढ़वाल में अपनी खोई जमीन वापस पाने की बड़ी चुनौती है। इसी वजह कांग्रेस का फोकस गढ़वाल पर है, तभी तो हाल ही में उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश प्रभारी ने गढ़वाल क्षेत्र में कई बैठकें की और मीडिया के सामने कई बार सत्ता परिवर्तन पर ज्यादा जोर दिया
2022 विधानसभा चुनाव से कांग्रेस ने लिया सबक
देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों की कुल 41 विधानसभा सीटें गढ़वाल मंडल में आती हैं। बता दें अगर 2022 विधानसभा चुनाव की बात करें तो गढ़वाल मंडल में बीजेपी की संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति कांग्रेस पर भारी पड़ी थी।
नए चेहरों पर दाव खेलेगी कांग्रेस
वहीं कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी और कमजोर बूथ प्रबंधन से जूझती रही, लेकिन अब कांग्रेस 2027 चुनाव को देखते हुए संगठन मजबूत करने और नए चेहरों को आगे लाने पर फोकस कर रही है। साथ ही जनता के मुद्दों को लेकर आक्रामक रणनीति बनाने में जुटी है।
गढ़वाल क्षेत्र में रहा है इन नेताओं का प्रभाव
BJP का पारंपरिक आधार गढ़वाल में मजबूत माना जाता रहा है, लेकिन कांग्रेस भी यहां से सत्ता परिवर्तन का रास्ता खोजती रही है। अनिल बलूनी, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, भुवन चंद्र खंडूरी, हरीश रावत और गणेश गोदियाल जैसे बड़े नेताओं का प्रभाव भी गढ़वाल क्षेत्र में रहा है।