उत्तराखंड: हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया ये गांव, नहीं थम रहे आंसू

देहरादून: देहरादून जिले का एक गांव अब हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। सोमवार की शाम को गांव ने हमेशा के लिए जल समाधि ले ली है। यह गांव देहरादून का लोहारी गांव है, जहां कभी 66 से ज्यादा परिवार रहा करते थे। अब यह गांव हमेशा के लिए बांध की झील में जलमग्न हो गया है। गांव को जल समाधि लेते देख लोगों की आंखें भर आई हैं। लोग अपने गांव को छोड़ने का तैयार नहीं थै। आखिरी वक्त तक वो अपने गांव को नहीं छोड़ने की जिद्द पर अड़े रहे। लेकिन, आखिरकार उनको गांव छोड़ना ही पड़ा।

जल समाधि लेते गांव की तस्वीरें किसी को भी विचलित कर सकती हैं। यहां कभी बच्चों के हंसते खेलने की किलकारियां गूंजा करती थी और यहां के लोग भी बड़े खुशहाल से  अपना जीवन यापन करते थें लेकिन आज बाप दादाओ द्वारा बनाये गए आशियानों को अपनी आँखों के सामने अपने घरों को उजड़ता देख लोगो का दर्द आसुओ के जरिये छलकता साफ दिखाई दे रहा था। लेकिन ऊंचाई पर बैठे रोते-बिलखते गांव के ये लोग अपने खेत खलियान ओर आशियानों को डूबता देख निहारते रहे। गांव के डूबने का दर्द उत्तराखंड के टिहरी ओर लोहरी गांव के ग्रामीणों के अलावा कोई नही समझ सकता।

दरअसल, 1972 में व्यासी जल विद्युत परियोजना की आधारशिला रखी गई थी।  जिसके बाद यह पूरा इलाका बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ गया था। सरकार ने उस समय गांव वालों को विस्थापित करने और मुआवजा भी दिया। ऐसे में व्यासी जल विद्युत परियोजना को सबसे पहले जेपी कंपनी ने बनाया लेकिन साल 1990 में एक पुल के टूटने के कारण यह डैम फिर से अधर में लटक गया। जिसके बाद छज्च्ब् कंपनी ने इस बांध को बनाने का ठेका लिया और लंबी जद्दोजहद के बाद यह डैम फिर से अधर में लटका रहा।

वहीं, साल 2012 में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार आने के बाद यह डैम उत्तराखंड जल विद्युत निगम को दिया गया। हालांकि, इस परियोजना का काम लगभग पूरा काम हो चुका है और जल्द ही उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। यही वजह है कि अप्रैल 2022 में प्रशासन ने लोहारी गांव के लोगों को नोटिस दिया कि यह गांव अब खाली कर दिया जाए। प्रशासन के नोटिस देने के बाद उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने धीरे धीरे पानी की मात्रा बढ़ानी शुरू कर दी, जिसके बाद से डैम के झील का पानी लोहारी गांव के खेतों तक पहुंच गया। और सोमवार शाम तक पूरा गांव ने ही जल समाधि ले ली।

आखिरकार लम्बी जद्दोजहद के बाद कालसी तहसील के लोहारी गांव को मौके पर पहुंची प्रशासन की टीम ने खाली करा ही लिया। आपको बता दें कि 120 मेगावाट की व्यासी जल विद्युत परियोजना के डूब क्षेत्र में आए लोहारी गांव को खाली कराये जाने की कवायद लम्बे समय से की जा रही थी। वहीं, प्रशासन की और से लगभग 66 परिवारों को 7 गुना मुआवजा दिया गया है ।

80 प्रतिशत पैसा भी उनके खातों में डाल दिये और 20 अपैल तक सारा पैसा खातो मे डाल दिया जायेगा । साथ ही परिवारों के रेंट का पैसा भी प्रशासन की और दिया गया है । लोहारी गांव के विस्थापित परिवारों का जिसका घर डूब गये है उन 11 परिवारों के लिए प्रशासन की और भूमि भी चयनित की जा रही है।  देहरादून जिलाधिकारी की माने तो  परिवारों की मांग के अनुसार उन्हें ज्यादा भूमि देने को लेकर विचार किया जा रहा है।

जल समाधि लिये यह गांव अब इतिहास के पन्नों मे ही याद किया जायेगा । जहां कभी 66 से ज्यादा परिवार गांव मे रहा करते थें वहीं गांव अब  व्यासी जल विद्युत परियोजना की भेंट चढ़ गया है। जिन गांवों में कभी फसलें लह लहा करती थी आज उन्ही गांव के खेत खलियान डूब रहे है। लेकिन अब यह खेत डूबे हुए  पुश्तेनी घर आंखों से ओझल हो रहे है। यह गांव अब सिर्फ यादों मे ही रह जायेगा और गांव वालों का  दर्द दिलों मे ठहर जायेगा।

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