उत्तराखंड बेहाल : टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में महिला ने सर्द रात में रास्ते में दिया बच्चे को जन्म

अल्मोड़ा : स्वास्थ्य सुविधांए उपलब्ध कराने के सरकार लाख दावे करती है लेकिन इन दावों की पोल तब खुलती है जब किसी को अस्पताल में इलाज नहीं मिल पाता और मरीज को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। सरकार के दावों की पोल तब खुलती है जब किसी गर्भवती महिला की सड़क ना होने के कारण अस्पताल न पहुंच पाने पर मौत हो जाती है। दुर्गम क्षेत्रों में अब तक कई गर्भवती महिलाओं की इलाज के अभाव के कारण मौत हुई। आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क नहीं पहुंच पाई. लोग घंटों पैदल सफर तय कर गांव पहुंचते हैं। बीमार होने पर या प्रसव पीड़ा के दौरान महिलाओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

ऐसा ही मामला सामने आया अल्मोड़ा के भैंसियाछाना ब्लॉक के रीठागाड़ क्षेत्र से जहां एक महिला ने गत देर रात पैदल रास्ते में बच्चे ने जन्म दिया है। प्रसव पीड़ा होने से उसको अस्पताल को लाया जा रहा था लेकिन सड़क में पहुंचने से पहले ही उसे अत्यधिक पीड़ा होने लगी। साथ में आई महिलाओं ने टार्च और मोबाइल की रोशनी में उसका सुरक्षित प्रसव कराया। इस गांव के लोग आज भी सड़क के अभाव के कारण दंश झेल रहे हैं।

आपको बता दें कि कनारीछीना के पतलचौरा गांव की 21 साल की प्रियंका बाणी पत्नी राजेंद्र सिंह वाणी को मंगलवार रात अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। गांव में सड़क सुविधा ना होने के कारण परिजन गर्भवती को डोली में लेकर रात में ही स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना ले जाने लगे। घर से कुछ ही दूरी में महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। गांव की ही कुछ बुजुर्ग महिलाओं और आशा की मदद से महिला बीच रास्ते में सर्द रात खेतों में ही बच्चे को जन्म दे दिया।

जानकारी मिली है कि जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं। महिलाओं और गांव वालों में रोष हैं। उनका कहना है कि वो लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं लेकिन वो आज तक पूरी नहीं हो सकी। अभी सड़क तक पहुंचने के लिए ढाई किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। ब्लॉक मुख्यालय से 20 किमी की दूरी पर स्थित गांव आज तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है।

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