उत्तराखंड शर्मसार : बच्चों ने नहीं खाया दलित भोजनमाता के हाथ का खाना, घर से लाए टिफिन, अब नौकरी से निकाला

चंपावत : चम्पावत में इन दिनों दलित भोजन माता का मामला चर्चाओं में है। भारत देश सांप्रदायिक देश है जहां हर धर्म, जाति के लोग रहते हैं। सरकार भी एकता की, समानता की बात करती है लेकिन चंपावत में हुए एक वाक्या से उत्तराखंड के सरकारी तंत्र का असली रुप तो दिखा ही साथ ही ये भी पता चला कि जातिवाद किस तरह आज भी हावी है।

जिला प्रशासन के साथ शिक्षा विभाग की हो रही किरकिरी

आपको बता दें कि चंपावत में ये शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। चंपावत के दलित भोजन माता को जांतिगत रंग दिया गया जिससे अब जिला प्रशासन के साथ ही शिक्षा विभाग की भी किरकिरी हो रही है। इस मामले में विवाद बढ़ता देख मंगलवार को एडी बेसिक अजय नौटियाल, सीईओ, उपखंड शिक्षा अधिकारी अंशुल बिष्ट जांच के लिए स्कूल पहुंचे और दोनों पक्षों की बात सुनी। दस्तावेजों का निरीक्षण किया गया जिसमे पाया गया कि सुनीता की नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई है। बात सामने आई कि 4 दिसंबर को तैनाती का प्रस्ताव पारित किया गया और 13 को उन्हें नियुक्त कर दिया गया। नियम के अनुसार प्रस्ताव में उपखंड शिक्षाधिकारी और विद्यालय प्रबंधन समिति का अनुमोदन नहीं कराया गया। इस पर सीईओ ने सुनीता की नियुक्ति रद्द कर दी। अधिकारियों की बैठक के बाद फैसला लिया गया कि अब नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया होगी। उसमें सुनीता भी आवेदन कर सकती हैं।

बच्चों ने भोजनमाता के हाथ से खाना खाना किया बंद

जानकारी मिली है कि इस पर पर नियुक्ति के लिए एससी सुनीता देवी और सामान्य वर्ग की पुष्पा भट्ट ने आवेदन किया था। एक पक्ष का कहना था कि अभिभाव-शिक्षक संघ (पीटीए) और विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक में परित्यक्ता पुष्पा को भोजन माता के रूप में नियुक्त करने का फैसला लिया गया लेकिन प्रिंसिपल की मनमानी के चलते सुनीता को नियुक्ति दी गई। इस बीच शनिवार को पुष्पा के समर्थन में कुछ लोग स्कूल पहुंचे और उन्होंने सुनीता की नियुक्त का विरोध किया। इसी के बाद एक वर्ग के बच्चों ने सुनीता का पकाया भोजन खाना बंद कर दिया।

सुनीता ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से की शिकायत

बता दें कि मामले में सुनीता ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर जाति सूचक शब्दों के प्रयोग का आरोप लगाया। बताया कि बच्चों को मेरे द्वारा बनाया गया भोजन को ना खाने के लिए कहा गया। सुनीता ने इसकी शिकायत न्यायिक मजिस्ट्रेट टनकपुर की अदालत में भी की है।

सुनीता देवी की नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई- एडी बेसिक 

इस मामले एडी बेसिक अजय नौटियाल ने जानकारी दी कि सुनीता देवी की नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई है। जांच के बाद दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें सुनीता भी आवेदन कर सकती हैं। वहीं मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित ने का कहना है कि सुनीता देवी को पद से हटा दिया गया है। जांच के बाद नियुक्ति में मनमानी करने वाले प्रधानाचार्य के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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