इसलिए कहते हैं उत्तराखंड पुलिस को ईमानदार और कर्मठ

देहरादून : उत्तराखंड पुलिस ने अपनी अलग पहचान बनाई है। चाहे कुंभ मेला हो या चारधाम यात्रा या कोरोना काल और लॉकडाउन…उत्तराखंड पुलिस का अलग चेहरा देखने को मिला। उत्तराखंड पुलिस लॉकडाउन में बेसहारा का सहारा बनी तो वहीं चारधाम यात्रा में बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालुओं के लिए डॉक्टर और सेवक बनी। अपनी सजगता और चौकसी से एक जिम्मेदार वर्दी धारक के कर्तव्य व ईमानदारी के मूल्यों का अच्छा उदाहरण देखने को कई बार मिला। वहीं पुलिस का मानवीय आज एक बार फिर से सामने आया। जी हां आज देहरादून के कोतवाली नगर स्थित दुकानों के पास से गुज़र रहे उत्तराखंड पुलिस के एसडीआरएफ,जॉलीग्रांट में तैनात जवानों तरुण कांत शर्मा और नईम अकरम को कोतवाली से कुछ ही दूरी पर जाने पर सड़क पर कुछ रुपये गिरे हुए मिले। उन दोनों जवानों ने उन रुपयों को उनके मूल मालिक तक पहुँचाने की ठानी। एसडीआरएफ के जवानों ने तुरन्त एसपी सिटी सरिता डोबाल से उनके कार्यालय में मिले और उनको इस संबंध में पूर्ण जानकारी दी।

पुलिस अधीक्षक नगर ने दोनों जवानों द्वारा उनकी ईमानदारी की सराहना करते हुए उन रुपयों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी लेते हुए अपने अधिनस्थों को किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने पैसों के खोए जाने के संबंध में शिकायत करने पर जानकारी लेने को कहा है और अपील की कि जिस किसी के भी रुपये खोए हैं वह आकर उनके कार्यालय से ले सकता है। एसडीआरएफ के जवानों द्वारा किसी जरूरतमंद की इस क्षति को जानकर और पुलिस अधीक्षक नगर को तुरंत सूचित करना उनके फर्ज के प्रति जिम्मेदारी और उनकी ईमानदार छवि को दर्शाता है जो सराहनीय है।

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