तो क्या प्रेमचंद अग्रवाल को मिल गई क्लीन चिट? कौन देगा जवाब?

puhskar singh dhami with prem chand agrawalविधानसभा में बैकडोर से हुई नियुक्तियों के मामले में बनी जांच समिति की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इस रिपोर्ट के आने के साथ ही विधानसभा में सैंकड़ों कार्मिकों की नियुक्ति रद्द हो गई है। इसके साथ ही सचिव को सस्पेंड कर दिया गया है लेकिन इस सबके बीच जो एक सवाल सबके जेहन में है वो है तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को लेकर। क्या प्रेमचंद अग्रवाल को क्लीन चिट दे दी गई है?

प्रेमचंद अग्रवाल हालांकि फिलहाल जर्मनी में स्टडी टूर पर हैं लेकिन उनकी चर्चा उत्तराखंड में खूब हो रही है। विधानसभा में हुई नियुक्तियों की जांच कर रही समिति ने पाया है कि नियुक्तियां अवैध हैं और नियमों को अनदेखा करते हुए की गईं हैं। वहीं समिति ने विधानसभा सचिव के प्रमोशन दर प्रमोशन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्हें डिमोट करने की सिफारिश की गई है।

अगर विधानसभा में हुईं नियुक्तियां अवैध हैं तो उनको नियुक्ति देने वाले विधानसभा अध्यक्षों पर क्या कार्रवाई होगी इसका जवाब कोई नहीं देना चाहता है। 2016 से 2022 की फरवरी महीने तक क्रम से गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद अग्रवाल ने अध्यक्ष पद संभाला। इन दोनों ने नियमों का हवाला देकर धुआंधार नियुक्तियां कीं। हालांकि इनमें से बहुतेरी नियुक्तियां अब नियम विरुद्ध साबित हो चुकी हैं। वहीं प्रेमचंद अग्रवाल बार बार ये बयान देते रहे कि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है लेकिन समिति की रिपोर्ट साबित कर रही है कि नियमों का ध्यान नहीं रखा गया। ऐसे में सवाल ये भी है क्या प्रेमचंद अग्रवाल पहले भरमाने की कोशिश कर रहे थे या अब सच सामने आने के बाद उन्हें बचाने की कोशिश हो रही है।

फिर समिति ने जिस मुकेश सिंघल की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा किया है उन्ही मुकेश सिंघल पर प्रेमचंद अग्रवाल की बतौर विधानसभा अध्यक्ष कितनी कृपा दृष्टि रही ये सबको पता है। जब मुकेश सिंघल पर कार्रवाई हो रही है तो प्रेमचंद अग्रवाल को कैसे भुलाया जा सकता है?

वहीं इस मसले में अब सरकार कुछ और खास नहीं करने जा रही है। सीएम धामी के एक बयान से साफ हो रहा है कि सरकार ने बड़ी बारीकी से प्रेमचंद अग्रवाल को बचा लिया है। सीएम ने कहा है कि अब ये मामला यहीं खत्म हो गया।

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