उत्तराखंड के जेलों में बदले कैदियों से मुलाकात के नियम, अब बाहर से नहीं ले जा पाएंगे कुछ

देहरादून : उत्तराखंड में अक्सर ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमे जिसमे जेलों में बंद कैदियों तक फोन, चरस, ड्रग्स पहुंचाई गई है। आए दिन जेलों से अपराधी अपराध को अंजाम दे रहे थे। इसको देखते हुए सवाल ये खड़ा हुआ कि आखिर आरोपियों तक ये सब चीजें कैसे पहुंची और किसने पहुंचाई? साथ ही जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए गए।

लेकिन अब जेलों के नियम सख्त हो गए हैं. बता दें कि इन घटनाओं को देखते हुए जेलों में कैदियों से मुलाकात के नियम बदल गए हैं। अब बाहरी खाने और पेय पदार्थो पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। खाने के सामान समेत पेय पदार्थ और कई सामग्रियों को अंदर ले जाने में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

आपको बता दें कि उत्तराखंड में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिसमे अपनों से जेल में मिलने आए परिजन खाने केे सामान के बहाने नशीला पदार्थ लेकर आए। इतना ही नहीं बाहर से पका हुआ खाना जेल के अंदर ले जाने में जहर की आशंका से लेकर मादक पदार्थों की शिकायत भी मिली है।नशे के आदी वाले कैदियों के परिजन मुलाकात के समय चिप्स, बिस्कुट, मूंगफली, तरबूज जैसे खाने की चीजों में चरस और स्मैक मिलाकर दे देते हैं। जिसे जेल प्रशासन ने चेकिंग के दौरान देहरादून सुद्धोवाला जेल में कई बार पकड़ा गया है। ऐसे में कैदियों से मुलाकात के लिए अब सभी जेलों में सघन तलाशी के बाद ही परिजनों और परिचितों को कैदियों से मुलाकात करने दिया जाएगा।

देहरादून सुद्धोवाला जेल के जेलर पवन कुमार कोठारी ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार नियम कायदे पहले से ही तय हुए रहते हैं। उसी आधार पर कैदियों के परिजनों को सप्ताह में दो बार ऑनलाइन पर्ची बनाने के नियम के साथ मुलाकात कराई जाती है। उन्होंने कहा कि एक बार में 3 लोग ही संबंधित कैदी से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जेल के अंदर कुछ कैदियों से मुलाकात में प्रतिबंध लगाया जाता है। क्योंकि देखा गया है कि जेल के अंदर भी कई बार वह हमला कर देते हैं। फिर उनसे मिलने वाले लोग उन्हें नशा सामग्री या अन्य जहरीली पदार्थ भी दे सकते हैं. इसके चलते ऐसे कैदियों से मुलाकात के लिए नियमानुसार प्रतिबंध लगाया जाता है।

जेल में मुलाकात करने का नियम सप्ताह में दो बार का होता है. लेकिन किसी इमरजेंसी में अगर कैदी से तीसरी बार परिजनों को मुलाकात करनी हो तो इसको लेकर जेल सुपरिटेंडेंट के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर विशेष अनुमति ली जा सकती है. जेलर पवन कोठारी के मुताबिक, सुपरिटेंडेंट के पास यह अधिकार है कि वह विशेष परिस्थितियों में इसकी अनुमति दें।  ऐसे में परिजन और परिचित से तीसरी बार मुलाकात के विषय में पूछताछ का कारण जानना महत्वपूर्ण है। तभी तीसरी बार मुलाकात की अनुमति दी जाती है। जेलर ने बताया कि कई बार कैदियों से मिलने वाले परिजन ऐसी सामग्रियां लेकर आते हैं, कई बार ऐसा देखा गया है कि परिजन खाने की सामग्री या डिब्बा में नशीला पदार्थ के अलावा मोबाइल, धारदार हथियार लेकर आ जाते हैं। ऐसे में सघन चेकिंग के दौरान जब ऐसी चीजें पकड़ी जाती है तो उन संबंधित कैदियों के मुलाकात पर न सिर्फ प्रतिबंध लगाया जाता है। बल्कि उनके इस क्रियाकलाप के बारे में कोर्ट को एक रिपोर्ट पेश करने के साथ ही परिजनों की इस हरकत पर स्थानीय पुलिस को भी शिकायत दी जा सकती है।

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