अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कहा- कोरोनाकाल में एलोपैथिक डॉक्टर देवता के सामान

हरिद्वार: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा है कि कोरोना संक्रमण काल में एलोपैथिक चिकित्सक देवता स्वरूप कार्य कर रहे हैं, उनका आदर सम्मान होना चाहिए ना कि उन्हें अपशब्‍द कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एलोपैथिक चिकित्सकों की अथक मेहनत, निस्वार्थ सेवा और कार्य का ही परिणाम है कि देश में करोड़ों कोरोना संक्रमित की प्राण रक्षा का होना। इन चिकित्सकों ने अपनी निस्वार्थ सेवा और कार्य से इन लोगों की प्राण रक्षा की और अस्पताल से सुरक्षित घर पहुंचाया।

गंभीर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को अपने घर परिवार से दूरी बनाकर महीनों इनके बीच में रहना और उन का सफल इलाज करना यह इनकी सेवा भावना को दर्शाता है। चिकित्सकों ने आम मरीजों की प्राण रक्षा के लिए अपने परिवार और स्वजनों की चिंता को दरकिनार कर दिया। तमाम ने इस कारण अपनी जान की परवाह भी नहीं की। ऐसे चिकित्सकों को उनका नमन। आयुर्वेद बनाम एलोपैथिक को लेकर चल रहे विवाद पर महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि आयुर्वेद की महानता अपनी जगह है, पर एलोपैथी भी कारगर और वर्तमान समय का अचूक इलाज है। किसी एक को दूसरे से कमतर या कमजोर कहना, उनके साधकों को गलत ठहराना, उन्हें अपशब्द कहना अनुचित है। वह इसे सही नहीं मानते।

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि योगगुरु बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन इन दिनों एलोपैथी को लेकर या एलोपैथिक चिकित्सकों को लेकर वह अपने जो विचार प्रकट कर रहे हैं, उनसे वह कतई सहमत नहीं है। कहा कि एलोपैथिक चिकित्सकों का निरादर करना, उन्हें गलत ठहराना, कहीं से भी उचित नहीं। वह सभी चिकित्सकों का सम्मान करते हैं, कोरोना काल में उनकी सेवा भावना का आदर करते हैं। चिकित्सकों ने आम जनता के हित में उनकी प्राण रक्षा को बेहतर कार्य और परिणाम दिया है।

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