
पिथौरागढ़: नंदा देवी में पर्वतारोहण के दौरान एवलांच की चपेट में आकर जान गंवाने वाले सात पर्वतारोहियों में से चार पर्वतारोहियों के शवों को आईटीबीपी के जवानों ने 18900 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इसके लिए 11 घंटे लंबा ऑपरेशन चला। इस अभियान को दुनिया का सबसे कठिन रेस्क्यू अभियान माना जा रहा है।
आईटीबीपी के जवानों ने शवों को साढ़े चार सौ मीटर की खड़ी दीवार से नीचे उतारने के बाद बेस कैंप तक पहुंचा दिया जाएगा। आईटीबीपी ने इसे विश्व का पहला और तकनीकी रूप से सबसे कठिन अभियान बताया है। नंदा देवी में पर्वतारोहण के दौरान पर्वतारोहियों के शव पिंडारी की ओर गिर गए थे। भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 18 हिमवीरों ने पर्वतारोही और बल के सेकेंड कमान अधिकारी आरएस सोनाल के नेतृत्व में सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर ऑपरेशन शुरू किया। बर्फ और खतरनाक दर्रो से शवों को लेकर तीन किलोमीटर चलकर 18900 फीट की ऊंचाई पर स्थित चोटी तक पहुंचे।
आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया डेयर डेविल अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को पूरे सम्मान के साथ लाया जा रहा है। डीआईजी के अनुसार एक शव का भार 80 से 90 किलो तक है। कठिन दर्रों और बर्फ में जवानों ने अभी तक इस काम को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतारोहियों के शवों को निकालने में जो तकनीक अपनाई जा रही है वह विश्व का अपनी तरह का पहला अभियान है।
