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स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने पद से दिया इस्तीफा, अखिलेश को पत्र लिखकर बताया कारण, जानें यहां

अपने बयानों को लेकर लंबे समय से विवादों में चल रहे नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि उन्होनें पार्टी से नहीं बल्कि अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्होनें अपने इस्तीफे को लेकर सपा पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लंबा चौड़ा पत्र लिखा और कारण साक्षा किया है। आइये जानते हैं स्वामी प्रसाद मौर्य के पद से इस्तीफा देने का कारण।

क्या बताए मौर्य ने अपने इस्तीफे में कारण?

अपने इस्तीफे में नेता मोर्य ने कहा कि पार्टी को जनाधार देने के लिए उन्होनें 2023 में जातिवार जनगणना, आरक्षण बचाने, बेरोजगारी व संविधान बचाने के लिए अखिलेश यादव को रथयात्रा निकालने का सुझाव दिया था लेकिन इस यात्रा के शुरु करने की सहमति तो दिखाई गई लेकिन इसे कभी शुरु नहीं किया गया।

नेता मौर्य ने कहा कि मैंने ढोंग ढकोसला, पाखंड व आडंबर पर प्रहार किया तो भी यही लोग इस प्रकार की बातें करते नजर आए, हमें इसका भी मलाल नहीं है, क्योंकि मैं तो भारतीय संविधान के निर्देश के क्रम में लोगों को वैज्ञानिक सोच के साथ खड़ा कर लोगों को सपा से जोड़ने की अभियान में लगा रहा।  

मुझे जान से मारने की धमकियां मिलीं

इस अभियान के दौरान मुझे गोली मारने, हत्या करने, नाक-कान काटने की धमकियां भी मिली, कई बार जानलेवा हमले हुए लेकिन मैं बाल-बाल बचा। उल्टे सत्ताधारियों द्वारा मेरे खिलाफ अनेको एफआईआर भी दर्ज कराई गई किंतु अपनी सुरक्षा की बिना चिंता किये हुए मैं अपने अभियान में निरंतर चलता रहा। 

पार्टी में भेदभाव का आरोप लगाया

वहीं अखिलेश यादव को लिखे पत्र में नेता मौर्य ने कहा कि मैंने अपने तौर-तरीके से पार्टी का जनाधार बढ़ाना जारी रखा। लेकिन भाजपा के जाल में फंसे लोगों को वापस लाने की कोशिश की तो पार्टी के कुछ नेताओं ने इसे मौर्य जी का निजी बयान बताया। स्वामी मौर्य ने आगे कहा कि मैं सपा पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव हूं लेकिन मेरा बयान पार्टी का बयान हो जाते हैं। ये हैरानी की बात है। उन्होनें पत्र में कहा कि यदि महासचिव के पद में भी भेदभाव है तो मैं इस पद का त्याग करता हूं।

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