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महेंद्र भट्ट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर चौंकाया, एक साथ BJP ने साधे कई समीकरण

उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी अक्सर ही अपने फैसलों से सभी को चौंका देती है। इसी बीच बीजेपी ने एक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। दरअसल बीजेपी ने राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा की है। इसके लिए बीजेपी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को चुना गया है। महेंद्र भट्ट का राज्यसभा जाना लगभग तय है। लेकिन भाजपा ने महेंद्र भट्ट को राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार बनाकर क्या समीकरण साधे हैं इस खास रिपोर्ट में पढ़ें।

महेंद्र भट्ट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर चौंकाया

उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट को लेकर 15 फरवरी तक नामांकन होने हैं। अभी तक किसी भी उम्मीदवार के द्वारा नामांकन नहीं कराया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी जो कि उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद भी हैं उनका कार्यकाल अप्रैल में खत्म होने जा रहा है। उनकी खाली हो रही सीट पर महेंद्र भट्ट को पार्टी के द्वारा उम्मीदवार बनाया गया है। यानी कि जो अटकलें अनिल बलूनी को राज्यसभा सीट पर रिपीट को लेकर थी उन पर भी पार्टी ने विराम लगाने का काम किया है।

सीमांत जनपद के वोटर्स को साधने की कोशिश

महेंद्र भट्ट को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाकर पहला समीकरण जो बीजेपी ने साधने की कोशिश की है वो है सीमांत जनपद के वोटर्स को साधना। अक्सर देखने में आया है कि चमोली जिले में मंत्री पद पर भाजपा ज्यादा फोकस नहीं करती है इसलिए धामी सरकार में भी इस जिले का प्रतिनिधित्व नहीं है। इसलिए पार्टी ने सीमांत जनपद से राज्यसभा उम्मीदवार तय किया है। ताकि इस जनपद के वोटरों को लोकसभा चुनाव में साधने का काम किया जाए।

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे महेंद्र भट्ट को जब अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई तो तब भी इस समीकरण को साधने का काम किया गया था लेकिन लगता है कि भाजपा हाई कमान की नजरों में सीमांत जनपदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सीमांत जनपद चंपावत से ही विधायक का चुनाव जीतकर आए। तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट वर्तमान में सीमांत जनपद के साथ राज्यसभा के उम्मीदवार बनाए गए, जिससे पार्टी के द्वारा पूरे प्रदेश में सीमांत जनपदों को प्रमुखता देने से सीमांत जनपद के वोटरों को भी साधने का काम किया गया है।

ब्राह्मण वोट साधने की तैयारी

ब्राह्मण चेहरा राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने ब्राह्मण वोटों को भी साधने का काम किया है। ठाकुर वोटरों को साधने के लिए जहां मुख्यमंत्री का पद भाजपा के द्वारा पुष्कर सिंह धामी को सैंपा गया है। तो वहीं लोकसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए पार्टी ने अनिल बलूनी जो कि ब्राह्मण चेहरे तहत उनके जगह ब्राह्मण चेहरे को ही राज्यसभा सीट के लिए तरजीह दी है।

संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को साधने की भी कोशिश की गई है। उत्तराखंड भाजपा संगठन की जिम्मेदारी इस समय महेंद्र भट्ट की कंधों पर है ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले संगठन के मुखिया को राज्यसभा भेज कर पार्टी के द्वारा ये भी संदेश दिया गया है कि संगठन के लिए जो भी काम कर रहा है पार्टी समय आने पर उनको मौका देने से नहीं चूकेगी। जिससे संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उत्साह देखने को मिल रहा है।

गुटबाजी में ना पड़े तो पार्टी देगी इनाम

जहां एक ओर भाजपा ने सीमांत और ब्राह्मण वोट साधने की कोशिश की है तो वहीं एक संदेश पार्टी के द्वारा ये भी दिया गया है कि अगर प्रदेश में गुटबाजी के चक्कर में कई नहीं पड़ता है तो पार्टी उसका पूरा ख्याल रखेगी। यही वजह है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाया।

इसी तरीके से महेंद्र भट्ट को पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया जो की 2022 का विधानसभा चुनाव हार गए थे और अब उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार पार्टी के द्वारा बनाया गया। यानी की पार्टी नेताओं के लिए एक संदेश ये भी गया है कि पार्टी के लिए जो गुटबाजी के चक्कर में ना पढ़कर पूरी तन्मयता के साथ काम करेगा उसे पार्टी इसका इनाम भी देगी।

महेंद्र भट्ट का राज्यसभा जाना तय

महेंद्र भट्ट का राज्यसभा पहुंचाना तय है क्योंकि संख्या बल के आधार पर आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा के पास 70 विधानसभा सीटों में से 47 विधायक है। यानी की वोटिंग होने पर भी एक तरफा महेंद्र भट्ट राज्यसभा पहुंच जाएंगे। जबकि कांग्रेस पूरी तरीके से वॉक ओवर देने का मन बन चुकी है। जिससे लगता है कि महेंद्र भट्ट निर्विरोध ही राज्यसभा पहुंच जाएंगे।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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