28 साल से MBBS की पढ़ाई कर रहा छात्र, कोर्ट के आदेश पर आया रिजल्ट, फिर फेल

उत्तर प्रदेश से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आ रहा है। यहां बीआरडी कॉलेज में 15-20 साल से तीन स्टूडेंट्स MBBS में फंसे हैं। करीब एक दशक बाद भी स्टूडेंट अपने एमबीबीएस रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिजल्ट के लिए कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। कोर्ट के आदेश के बाद 2009 बैच के स्टूडेंट का रिजल्ट जारी किया गया। हालांकि वो उसमें भी फेल हो गया।
28 साल से MBBS की पढ़ाई कर रहा छात्र
दरअसल भारत में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट ( NEET) क्वालीफाई के बाद MBBS की पढ़ाई पूरी करने में 5.5-6 साल का समय लग जाता है। 4.5 साल का एमबीबीएस का कोर्स और एक साल की रोटेटिंग इंटर्नशिप। मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज का है। यहां के तीन स्टूडेंट्स 15-20 सालों से MBBS की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। वो एमबीबीएस में ही फंसे पड़े हैं। लंबे समय से अटके एमबीबीएस के रिजल्ट को जारी करने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
तीन स्टूडेंट्स 20 सालों से नहीं कर पाए MBBS
हैरान की बात तो ये है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब एक स्टूडेंट का 15 साल बाद एमबीबीएस रिजल्ट आया तो उसमें भी उसे निराशा ही हाथ लगी है।
दरअसल तीनों छात्र ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन लिया। ये 1998, 2009 और 2010 बैच के हैं। लेकिन कुछ परीक्षाओं में फेल हो गए। समय बीतता गया और उनका रिजल्ट अटक गया। जिससे उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई। खबरों की माने तो तीनों ने साल 2024 में भी एमबीबीएस फाइनल ईयार का पेपर दिया था। जिसके बाद उनका रिजल्ट नहीं आया।
कोर्ट के आदेश के बाद आया रिजल्ट, फिर फेल
लंबे समय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी ना करने पर निराश 2009 बैच वाले छात्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट के आदेश के बाद कॉलेज ने रिजल्ट जारी किया। लेकिन वो उसमें भी फेल हो गया। हालांकि अब सप्लीमेंट्री एग्जाम में स्टूडेंट को बैठने की परमिशन मिल गई है।
1998 और 2010 बैच के स्टूडेंट्स को भी रिजल्ट का इंतजार
अब 1998 और 2010 बैच के स्टूडेंट्स भी अपने रिजल्ट के इंतजार में हैं। अभी इनके रिजल्ट की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। हालांकि MBBS की पढ़ाई करने के नियम कहते है कि इस कोर्स को पूरी करने की अवधि 10 साल तक है। इसके बाद रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाता है। चूंकि तीनों छात्रों का एडमिशन 2014 से पहले हुआ था। जिसकी वजह से ये 10 साल वाले नियम के दायरे से बाहर हैं।