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अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल, सोशल एक्टिविस्ट को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पड़ा भारी

देश में लगातार सामने आ रही राजनीतिक उन्माद से जुड़ी घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं। अलग-अलग समुदायों के बीच बढ़ती खाई और बयानबाज़ी अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक दिखाई देने लगी है। जहां एक ओर सोशल मीडिया लोगों को अपनी बात रखने का मंच देता है, वहीं दूसरी ओर अब इसी मंच पर कही गई बातों को लेकर कानूनी कार्रवाई के मामले भी सामने आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाना पर मुकदमा दर्ज

ऐसा ही एक मामला राजधानी देहरादून से सामने आया है, जहां सोशल एक्टिविस्ट स्वाति नेगी (swati negi) को सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाना भारी पड़ता नजर आ रहा है। स्वाति नेगी लंबे समय से समाज में फैल रही सामाजिक द्वेष की भावना और समुदायों को आपस में लड़ाने वाली राजनीति के खिलाफ खुलकर बोलती रही हैं। ताजा मामला उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट (Social media) से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने राज्य में बिगड़ते सांप्रदायिक माहौल पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

सत्ता की गुलामी तक सीमित होकर रह गया कानून: स्वाति

Social activist swati negi का कहना है कि इस पोस्ट के बाद उन्हें संबंधित पुलिस अधिकारी द्वारा पोस्ट हटाने के लिए कहा गया। इस पूरे मामले को लेकर स्वाति नेगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि क्या आज देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त हो चुकी है। क्या किसी नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में कानून अब सिर्फ सत्ता की गुलामी तक सीमित होकर रह गया है।

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अपने खिलाफ दर्ज किए जा रहे मुकदमों को बताया निराधार

स्वाति नेगी ने अपने खिलाफ दर्ज किए जा रहे मुकदमों को भी निराधार बताया। उनका कहना है कि ये कार्रवाई सिर्फ इसलिए की जा रही है क्योंकि उन्होंने सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में आवाज उठाई। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

कश्मीरी मुस्लिम युवकों के साथ हुई मारपीट को लेकर किया था पोस्ट

बता दें बीते दिनों पहले स्वाति नेगी ने सोशल मीडिया पर विकासनगर में कश्मीरी मुस्लिम युवकों के साथ हुई मारपीट को लेकर पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था ‘जो बीज तुमने बोए हैं उसी फसल आज लहरा रही है’। स्वाति कर आरोप है कि इसी पोस्ट को लेकर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें फ़ोन कर धमकाने की कोशिश की।

Sakshi Chhamalwan

उत्तराखंड की युवा और अनुभवी पत्रकार साक्षी छम्मलवाण टीवी और डिजिटल मीडिया दोनों में कार्य का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वे खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) से जुड़ी हैं। उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल, देश-दुनिया की प्रमुख खबरें और धर्म से जुड़े विषयों पर इनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक और गहन होती है। उत्तराखंड | TV + Digital Media खबर उत्तराखंड
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