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तो शांतिपूर्वक चल रहे धरने को पुलिस की गलती ने बदल दिया उग्र आंदोलन में?

lathi charge

देहरादून में लगातार भर्तियों में हो रहे घोटाले और पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे बेरोजगारों पर पुलिसिया कार्रवाई कई बड़े सवाल खड़े करती है। क्या बुधवार की रात पुलिस ने जिस तरह से बेरोजगारों को हटाया गया उसी कार्रवाई ने इस पूरे बवाल की पटकथा लिखी ? क्या पुलिस और सरकार बेरोजगारों की नाराजगी को भांपने में चूक गई? फिर लोकल इंटेलिजेंस को भी इस बारे में क्यों कोई सूचना नहीं मिली?

कैसे उमड़ा युवाओं का सैलाब?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि देहरादून में युवाओं का इतना बड़ा सैलाब कहां से आया? आखिर पुलिस और एलआईयू को इस बारे में जानकारी क्यों नहीं मिली?

जब बुधवार की रात धरने पर बैठे युवाओं को बलपूर्वक हटाने का वीडियो हर मोबाइल में पहुंच चुका था तो क्या ये पुलिस तक नहीं पहुंचा? फिर पुलिस ने युवाओं को क्यों इकट्ठा होने दिया? ऐसे में सवाल ये है कि क्या देहरादून पुलिस की एक गलती ने इसे उग्र आंदोलन में बदल दिया है?

घंटाघर पर हो गया लाठीचार्ज

राजधानी देहरादून में बेरोजगार युवा घोटाले और पेपर लीक मामले पर धरना कर रह थे। युवा गांधी पार्क और घंटाघर के पास प्रदर्शन कर रहे थे। जिसके बाद युवाओं ने घंटाघर के पास जाम लगा दिया। जिसको पुलिस खुलवाने की कोशिश कर रही थी। जिसके बाद पुलिस ने युवाओं पर लाठीचार्ज कर दिया। युवाओं को घंटाघर से हटाने के लिए दौड़ा- दौड़ा कर पीटा गया। लाठीचार्ज के विरोध में युवाओं ने भी पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।

धरने को बदल दिया उग्र आंदोलन में

आपको बता दें कि बीते रोज रात को भी शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पुलिस ने जबरन हटाया था। पुलिस ने रात को भी युवाओं पर बल प्रयोग किया था। पुलिस के इस कदम के बाद ही युवा इसके विरोध में आज प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन आज फिर से युवाओं पर लाठी चार्ज कर दिया गया।

जिसके बाद युवा आक्रोशित हो गए और पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस तरह देहरादून पुलिस की गलती ने शांतिपूर्वक चल रहे धरने को उग्र आंदोलन में बदल दिया। इसके बादजूद भी युवा गांधी पार्क के बाहर धरने पर बैठे हैं। लेकिन अब युवाओं को जबरन यहां से हटाया जा रहा है।

बेरोजगार युवाओं को जबरन हटाया

देहरादून पुलिस गांधी पार्क के सामने प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हटा रही थी। बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पंवार को भी पुलिस उठाकर ले गयी है। इसके साथ यहां प्रदर्शन कर रहे युवाओं को भी पुलिस पकड़ कर ले जा रही है। इन युवाओं को जेल में ले जाया जा रहा है। पुलिस के इस कदम के बाद युवा और भी ज्यादा आक्रोशित हो गए हैं।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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