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मणिपुर के इंफाल में बचे 10 कुकी परिवारों को किया शिफ्ट, हिंसा में भी नहीं छोड़ा था अपना घर

मणिपुर के इंफाल में 10 कुकी परिवारों को कांगपोकपी मे स्थानांतरित कर दिया है। राज्य में चार महिने पहले जातीय हिंसा भड़कने के बावजूद वह अपने घरों को छोड़ कर कहीं नहीं गए थे। लेकिन ये परिवार हमलावरों के टारगेट बने हुए थे इसलिए इन्हें इंफाल से 25 किमी दूर कांगपोकपी जिले के मोटबुंग में सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है।

कुकी परिवार ने लगाया आरोप

वहीं कुकी परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें न्यू लाम्बुलेन क्षेत्र में मोटबुंग में उनके आवासों से जबरन बेदखन किया गया है। कुकी इलाके की सुरक्षा करने वाले स्वंयसेवकों में से एक एस प्राइम वैफेई ने दावा किया है कि कुछ वर्दीधारी सशस्त्र कर्मियों की एक टीम 1 सितंबर की रात इंफाल के न्यू लाम्बुलेन में आई और 2 सितंबर को इंफाल में कुकी इलाके में बचे अंतिम निवासियों को उनके घरों से जबरन बेदखल कर दिया गया।

न्यू लैंबुलेन क्षेत्र में रहने वाले लगभग 300 आदिवासी परिवार 3 मई को जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से अपना घर छोड़ चुके हैं। वैफेई ने एक बयान में कहा, ‘हममें से 24 लोगों को अपना सामान पैक करने का भी समय नहीं दिया गया और हमें केवल पहने हुए कपड़ों के साथ वाहनों में ले गए।

मणिपुर की आबादी में मैतेई लोग ज्यादा

बता दें कि मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी – नागा और कुकी – 40 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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