भारतीय मूल के लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में हमला, चाकूओं से गोदा

Salman Rushdie

 

प्रख्यात लेखक सलमान रुश्दी (Salman Rushdie)पर अमेरिका के न्यूयॉर्क में हमला हुआ है। जब वे स्टेज पर लेक्चर के लिए जाने वाले थे, तभी हमलावर ने उन पर कूद आया और चाकुओं से कई वार किए। हमलावर का नाम हादी मतार है। उसके सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये माना जा रहा है कि ये एक ईरान समर्थक है। हमलावर को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया।

जानकारी के मुताबिक मतार न्यूजर्सी के फेयरव्यू स्थित अपने घर से यहां लगभग 650 किमी गाड़ी ड्राइव करके पहुंचा था। हादी मातर कथित तौर पर लेबनानी मूल का है। अधिकारियों ने मातर के न्यू जर्सी स्थित घर को सील कर दिया है। वहीं रुश्दी पर हुए हमले की साहित्य और वैश्विक राजनीतिक मंच पर निंदा की जा रही है।

युनाइटेड नेशन के महासचिव एंतोनियो गुतारेस लेखक सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बारे में जानकर ‘स्तब्ध’ हैं। गुतारेस ने कहा कि राय जाहिर करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए बोले गए या लिखे गए शब्दों की प्रतिक्रिया में हिंसा किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। उनके प्रवक्ता ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, ‘प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर हमले के बारे में जानकर महासचिव स्तब्ध हैं।’ गुतारेस ने रुश्दी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा, ‘ विचार व्यक्त करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए बोले गए या लिखे गए शब्दों गौरतलब है कि जाने-माने लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हमला होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। बताया जाता है कि हमलावर ने 20 सेकंड में रुश्दी पर 15 बार चाकुओं से हमला किया। हमलावर द्वारा उनकी गर्दन और पेट में छुरा घोंपने के बाद उनकी कई घंटों तक सर्जरी हुई। इसके बाद वे वेंटिलेटर पर हैं। समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक सलमान के बुक एजेंट के हवाले से खबर है कि हमले के बाद उनकी एक आंख की रोशनी जा सकती है। की प्रतिक्रिया में हिंसा किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है।’

उधर, न्यूयॉर्क पुलिस ने बताया कि हमलावर का नाम हादी मटर है और वो अमेरिका में फेयरव्यू,न्यू जर्सी का रहने वाला है। हालांकि हमलावर ने किस उद्देश्य से हमला किया, इसके कारण का पता अभी तक नहीं चल सका है। सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद उनका इलाज करने वाले चिकित्सक ने कहा कि रुश्दी के शरीर पर चाकू के हमले के कई निशान थे जिनमें से एक उनकी गर्दन के दाहिनी ओर था और वह खून से लथपथ पड़े हुए थे।

अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचारपत्र न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रुश्दी जिस कार्यक्रम में संबोधित करने वाले थे वहां मौजूद एंडोक्रिनोलॉजिस्ट रीटा लैंडमैन ने मंच पर जाकर रुश्दी का प्राथमिक उपचार किया।

विवादों में आए

भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखक रुश्‍दी 1980 के दशक में अपनी पुस्‍तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर विवादों में आए थे। इस किताब को ईरान में 1988 से प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि कई मुसलमान इसे ईशनिंदा मानते हैं। एक साल बाद, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने एक फतवा जारी कर रुश्दी की मौत का आह्वान किया गया था। फतवे के 33 साल बाद भी रुश्दी सुरक्षित नहीं हो पाए।

 

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