सगे भाई ने आने से किया मना तो ऋषिकेश पुलिस बनी अपनी, ऐसे बचाई जान

ऋषिकेश : कोरोना काल में अपना अपने सू दूर हो रहा है। कोरोना मरीज से मिलने से कतरा रहे है। यहां तक की कोरोना से मौत के बाद कोई अपनों के शवों को भी लेने नहीं आ रहे और ना ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड पुलिस अपनों का फर्ज निभा रही है। जी हां ऐसा ही हुआ ऋषिकेश में जहां सगे भाई ने आने से मना किया तो ऋषिकेश पुलिस एवं पुलिस द्वारा जारी हेल्पलाइन की तत्काल सहायता से उसकी जान बची।

दरअसल ऋषिकेश पुलिस ने आम जनता की मदद हेतु हेल्पलाइन नंबर 9897224109 जारी किया है। जिसपर 7 मई की रात को  दिल्ली से कॉलर सन्नी गाँधी द्वारा सूचना दी गई कि गली नंबर- 1, हरिधाम कॉलोनी ऋषिकेश में मेरे रिश्तेदार संतोष पत्नी स्व. पी.के.जैन उम्र 80 वर्ष एवं मनीष जैन पुत्र स्व. पी.के.जैन निवासी उपरोक्त उम्र 56 वर्ष अकेले निवास करते हैं, जो कि पैरों से विकलांग है। जिन्हें अभी सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही है और जिनके घर में कोई भी उनकी देखरेख के लिए मौजूद नहीधं है। जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराने की आवश्यकता है।
उक्त सूचना उच्च अधिकारियों को देते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश द्वारा हेल्पलाइन में नियुक्त पुलिस टीम के माध्यम से तत्काल सहायता प्रदान करने हेतु चौकी प्रभारी आईडीपीएल एवं रात चीता में नियुक्त कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।जिसपर चौकी प्रभारी आईडीपीएल मय चीता मोबाइल के उपरोक्त पते पर पहुंचे। जहाँ चीता पर नियुक्त कर्मचारियोध ने द्वारा तत्काल् एम्बुलेन्स बुलाकर स्वयं पी.पी.ई.किट पहनकर संतोष एवं दिव्यांग मनीष जैन को अपनी गोद में उठाकर एम्बुलेंस में बैठाया गया, एंव दोनो पीडित को राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। जिनको तत्काल ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाई गई।
राजकीय चिकित्सालय में डॉक्टर द्वारा चिकित्सा जांच करने के उपरांत बीमार महिला संतोष को कॉविड पॉजिटिव पाया गया, एवं उनके लड़के की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अब दोनों के स्वास्थ्य में सुधार है। दिल्ली से इनके परिवारजनों द्वारा ऋषिकेश पुलिस द्वारा तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध अपने रिश्तेदार की जान बचाने पर बचाने पर ऋषिकेश पुलिस का धन्यवाद अदा किया गया है।

1- उप नि. चिंतामणि मैठाणी, चौकी प्रभारी आईडीपीएल
2- कानि0 296 ओमवीर.पवांर
3- कानि0 932 महेश पुरी

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