उत्तराखंडः आयुर्वेद विश्वविद्यालय में विवादित मृत्युंजय मिश्रा की बहाली, विरोध भी शुरू

कोटद्वार: मृत्युंजय मिश्रा को फिर से आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव पर पर बहाल कर दिया गया है। ठीक चुनाव से पहले हुई इस बहाली पर विरोध भी शुरू हो गया है। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण मृत्युंजय मिश्रा की बहाली है।

उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने कहा कि मृत्युंजय मिश्रा के बहाली आदेश पर पहले ही लिखा गया है कि उन्हें सतर्कता अनुष्ठान द्वारा चल रही जांच प्रभावित ना हो इसलिए निलंबित किया गया था और सतर्कता अनुष्ठान द्वारा वह जांच सालों साल बाद भी अभी तक चल ही रही है, इसके बावजूद मृत्युंजय मिश्रा को उन्हें उनके पूर्व पद पर बहाल किया जाना और उनके सभी पूर्व वेतन भत्ते बहाल किया जाना बताता है कि भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है और इसके लिए भारतीय कानून के नियमों का उल्लंघन करने में भी नहीं चल रही है।

ऐसे भ्रष्टाचार के आरोपी जिनके खिलाफ सतर्कता अनुष्ठान जैसे अनुष्ठान द्वारा जांच की जा रही हो और जिनको निलंबित भी इसी वजह से किया गया हो कि उनके खिलाफ सतर्कता अनुष्ठान द्वारा जांच की जा रही है ऐसे में वे अपने विभाग में जांच को प्रभावित कर सकने की स्थिति में है इसलिए उन्हें निलंबित किया गया था ताकि जांच प्रभावित ना हो पाए और अभी तक जबकि जांच चल रही है, ऐसे में आरोपी को पुनः उसी पद पर बहाल कर दिया जाना बताता है कि भारतीय जनता पार्टी परोक्ष रूप से उस भ्रष्टाचार में शामिल है, जिनके आरोप की जांच सतर्कता अनुष्ठान कर रहा है।

निश्चित ही भ्रष्टाचारियों के द्वारा यह दबाव बनाया गया होगा कि यदि आरोपी की बहाली न कि गई तो चुनाव की बेला में वह कुछ रहस्योद्घाटन कर सकता है। उत्तराखण्ड विकास पार्टी भारतीय जनता पार्टी के ऐसे कुकृत्य के कड़ी निंदा करती है और मानती है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को बहाल कर रही है।

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