उत्तराखंड: युवाओं के लिए नहीं आ रहे रिश्ते, ये सड़क अटका रही रोड़ा

 

सितारगंज: राज्य के कई गांव आज भी सड़कों से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क नहीं होने से कई तरह ही दिक्कतें हैं, लेकिन ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज के गांव की समस्या कुछ ऐसी है, जिसको लेकर युवा खासे परेशान हैं। आलम यह है कि यहां युवाओं के रिश्ते तक नहीं हो पा रहे हैं। वह भी उस स्थिति में जब गांव के अधिकांश युवा फौज में हैं। इस गांव को फौजियों का गांव कहा जाता है।

भले ही आपने रोड की खस्ता हालत को लेकर अनेको परेशानियां होते जरूर सुनी और देखी होंगी लेकिन ऊधम सिंह नगर के सुनखरी कला ग्राम में फौजियों का एक गांव ऐसा भी है जहां रोड न होने से युवाओं के रिश्ते तक नही हो पाते हैं यदि शादी के रिश्ते हो भी जाते हैं तब रोड की खस्ता हालत को देखर रिश्तो की डोर टूट जाती है। आरोप है कि राज्य गठन के बाद तीन गांवों को जोड़ने वाली रोड अभी तक बनी ही नही है जब कि इससे पूर्व में सत्ता पक्ष के विधायक रहे थे।

नानकमत्ता विधानसभा की ग्राम सुनखरी कला में सैकड़ो परिवार से अधिक फौजीओ के परिवार भी रहते हैं जहां जब चुनावों का वक्त आता है तब गांवों तक वोट मांगने पहुंच जाते है लेकिन चुनाव के बाद फिर उन गांवों में लौटकर शायद ही जाते हैं । ऐसा ही कुछ हो रहा है ग्रामसभा सुनखरी कलां, धूमखेड़ा, कोदाखेड़ा के ग्रामीणों के साथ । इन तीन गांवों को जोड़ने वाली सड़क बदहाल है। खास बात यह है कि  इन क्षेत्रों में 120 से अधिक फौजियों के परिवार के परिवार भी बसे हैं।

इसके बावजूद कोई जनप्रतिनिधि इस सड़क की सुध लेने को तैयार नहीं है। 18 साल पहले बनी सड़क के पुनर्निर्माण की मांग पूरी न होने पर अब ग्रामीण हुंकार भरने पर मजबूर हैं। इतना ही नही बल्कि इस गांव में रोड नही होने की बजह से युवाओं के रिश्ते तक नही हो पाते हैं कई बार ऐसा हुआ है कि रिश्ते होने के बाद रोड की बजह से रिश्ते खत्म हो गए हैं। साथ मे ये भी एक अहम बात है कि ये सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ग्रह क्षेत्र है उसके बाद भी रोड अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

करीब छह किलोमीटर लंबी सड़क में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों के साथ ही उच्चाधिकारियों से कई बार सड़क निर्माण की मांग की। इसके बाद सीएम ओर पीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। लेकिन, अभी तक किसी भी अधिकारी ने टूटी सड़क के निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जनप्रतिनिधियों ने भी इस सड़क से मुंह फेर रखा है। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने के लिए आते हैं। लेकिन, चुनाव जीतने के बाद फिर लौटकर नहीं आते हैं। पिछले दस सालों से जनप्रतिनिधि सिर्फ सड़क बनाने के दावे ओर वादे तो करते हैं, लेकिन आज तक किसी ने सड़क नहीं बनवाई।

इस गांव के युवा देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने के लिए तैयार रहते हैं। जब ये अपने घर आते हैं, तब उनको घर तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। घर तक जाने के लिए कोई सवारी नहीं मिलती। बच्चों को स्कूल जाते वक्त भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। फौजी का कहना है यहां के रोड की स्थिति बहुत दयनीय है। इसमें एक से डेढ़़ फीट तक के गहरे खड्डे हो चुकें हैं। इस रोड को बने हुए 18 साल से अधिक हो चुके हैं।

गेहूं की खड़ी फ़सल में शॉर्टसर्किट से आग लग गयी थी, जिसके बाद आग बुझाने के लिए अग्नि शमन वाहन को बुलाया। लेकिन, इस टूटी रोड के कारण उसे घटना स्थल पर पहुंचने में काफी देर हो गई, जिसके कारण गेंहू की फसल को जलने से नहीं रोका जा सका। इनमें जो सबसे बड़ी समस्या है, वह यह है कि युवाओं के अब रिश्ते तक नहीं होते हैं। लोग गांव के युवाओं से अपनी बेटियों की शादी नहीं कराना चाहते।

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