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पिथौरागढ़ में नजर आया दुर्लभ स्नो लैपर्ड, दारमा वैली में जवानों ने किए दीदार

पिथौरागढ़ की दारमा वैली में दुर्लभ स्नो लैपर्ड नजर आया है। हिम तेंदुए के दिखने को हिमालय की अच्छी सेहत का संकेत माना जा रहा है। आईटीबीपी के जवानों ने स्नो लैपर्ड की तस्वीर लेनी चाही वो बर्फ में कहीं ओझल हो गया।

पिथौरागढ़ में नजर आया दुर्लभ स्नो लैपर्ड

स्नो लेपर्ड बेहद ही कम इंसानों को दिखता है। ये मानव बस्तियों से दूर ही रहते हैं। जिले की चीन सीमा से लगे इलाकों को इनका घर माना जाता है। चीन सीमा से लगे पिथौरागढ़ का हमेशा बर्फ से ढके रहने वाला 15 हजार फीट से ऊपर का ये इलाका हिम तेंदुओं का प्राकृति आवास है।

आपको बता दें कि पिथौरागढ़ जिले की दारमा घाटी में विदांग गांव में स्थित आईटीबीपी चौकी के पास जवानों ने हिम तेंदुए को देखा। जवानों ने इस खूबसूरत जानवर की तस्वीर अपने कैमरे में कैद करने की सोची लेकिन वो उस से पहले ही गायब हो गया।

आईटीबीपी ने वन विभाग को दी जानकारी

आईटीबीपी ने स्नो लेपर्ड देखे जाने की जानकारी वन विभाग की टीम को दी। जिसके बाद वन विभाग की टीम वहां पहुंची। स्नो लेपर्ड के बारे में जानकारी जुटाने के बाद वन विभाग की टीम वापस लौट आई। बता दें कि इस से पहले फरवरी 2023 में भी भारत-चीन सीमा पर स्थित दारमा, व्यास, चौदास लैंडस्केप के दारमा घाटी में हिम तेंदुआ नजर आया था।

ये होती है स्नो लेपर्ड की विशेषता

आपको बता दें कि स्नो लेपर्ड बेहद ही कन इंसानों को नजर आते हैं। इनकी लंबाई 1.4 मीटर होती है और इसका वजन 75 किलो तक हो सकता है। सबसे खास बात ये है कि हिम तेंदुआ 15 मीटर की उंचाई तक छलांग लगा सकता है। ये बेहद ही फुर्तिला होता है। ये बर्फिेले इलाकों में रहते हैं। उत्तराखंड में ये तेंदुुए नंदा देवी नेशनल पार्क के अलावा उत्तराकाशी के गोविंद पशु विहार, गंगोत्री  नेशनल पार्क, पिथौरागढ़ और ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में पाए जाते हैं।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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