कुतुप काल में करें पितरों का श्राद्ध, माना जाता है बेहद शुभ, जानें हर दिन का समय यहां

आज से पितृ पक्ष शुरु हो गए हैं जो कि 14 अक्टूबर को समाप्त होंगे। सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बड़ा महत्तव है। इस दौरान पितृर धरती पर वास करते हैं। ऐसे में पितरों का तर्पण, श्राद्ध के साथ पिंड दान करने का विशेष महत्तव है। माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण करने से वह तृप्त होते हैं और अपने परिवार को सुख समृद्धि, धन संपदा का आशीर्वाद देते हैं।
कुतुप काल क्या होता है
कहा जाता है कि कुतुप काल में ही पितरों का श्राद्ध करना चाहिए। कुतुप बेला दिन का आठवां प्रहर होता है। इसे श्राद्ध कर्म के लिए सबसे शुभ माना जाता है। पाप का शमन करने के कारण इसे कुतुप काल कहा जाता है। कुतुप काल सुबह 11 बजकर 30 मिनट से दिन के 12 बजकर 30 मिनट के बीच का समय होता है।
इस बार हर दिन का कुतुप मुहुर्त
पूर्णिमा श्राद्ध– 29 सितंबर को सुबह 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा कुतुप मुहुर्त
द्वितिया श्राद्ध– 30 सितंबर को सुबह 11 बजकर 38 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक
तृतीया श्राद्ध– 1 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक
चतुर्थी श्राद्ध– 2 अक्टूबर को 1 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक
पंचमी श्राद्ध– 3 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
षष्ठी श्राद्ध– 4 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
सप्तमी श्राद्ध– 5 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
अष्टमी श्राद्ध– 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक
नवमी श्राद्ध– 7 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक
दशमी श्राद्ध– 8 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
एकादशी श्राद्ध- 9 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक
मघा श्राद्ध- 10 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक
द्वादशी श्राद्ध– 11 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक
त्रयोदशी श्राद्ध– 12 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक
चतुर्दशी श्राद्ध- 13 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक
सर्व पितृ अमावस्या पर कुतुप काल– 14 अक्टूबर को 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक