पापा ये साल की आखिरी ट्रैकिंग है, कहकर निकली थी अनीता, साबित हुई जिंदगी की आखिरी ट्रैकिंग

उत्तरकाशी : हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग के दौरान कई गाइड, पोटर्स और ट्रेकर लापता हो गए थे जिनमे से 5 के शव बरामद किेए जा चुके हैं जिनमे मूल रूप से टिहरी निवासी और वर्तमान दिल्ली निवासी अनीता रावत भी शामिल थीं। ये ट्रेकिंग उनकी जिंदगी की आखिरी ट्रेकिंग साबित हुई। इस ट्रेकिंग ने उनकी जिंदगी छीन ली। अनीता रावत की मौत से परिवार अभी तक सदमे में है। वो इस सदमे से उभर नहीं पा रहा है।

दरअसल अनीता रावत कुछ दिन पहले ही मोरी-सांकरी क्षेत्र में ट्रेकिंग कर घर लौटी थीं। उनके घरवालों ने उसे इस ट्रेक पर जाने से मना किया था लेकिन अनीता ने पापा से कहा था कि ये इसकी साल की आखिरी ट्रेकिंग है। इस जिद्द ने अनीता का जिंदगी का सफर ही खत्म कर दिया। परिवार और खुद अनीता को क्या पता था कि ये ट्रेकिंग उसकी जिंदगी की आखिरी ट्रेकिंग होगी।

आपको बता दें कि अनीता रावत मूलरूप से टिहरी के बैल गांव निवासी थी। जो की परिवार के साथ दिल्ली में रह रही थी। अनीता (37) हर्षिल-छितकुल ट्रेकिंग पर गए 17 सदस्यीय दल में शामिल थी। 21 अक्तूबर को अनीता के परिवार को उसके लापता होने की खबर मिली। बाद में उसका शव बरामद हुआ। तभी से परिवार में मातम छाया हुआ है।

जानकारी मिली है कि अनीता पेशे से दंत चिकित्सक थीं जो की दिल्ली के एक नामी अस्पताल में भी सेवाएं दे चुकी थीं। लेकिन कुछ समय बाद अनीता ने पिता के साथ मिठाई औऱ बेकरी के बिजनेस में हाथ बटाया। अनीता को ट्रेंकिंग का काफी शौक था लेकिन ये शोक उसकी जान ले गया।

वहीं अनीता के पिता ने सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हर्षिल-छितकुल ट्रेक पर गए 17 सदस्यीय दल के 6 पोर्टर हिमाचल के सांगला पहुंच गए थे। उनकी सूचना पर तत्काल हेली रेस्क्यू शुरू हो जाता तो उनकी बेटी समेत सभी लोगों को बचाया जा सकता था। उन्होंने ट्रेकिंग के दौरान सेटेलाइट फोन अनिवार्य करने को भी आवश्यक बताया।

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