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पन्ना की ‘दादी’ Vatsala का निधन, एशिया की थी सबसे बुजुर्ग हथिनि, दर्ज नहीं हो पाया गिनीज रिकॉर्ड

Panna Oldest Elephant Vatsala Death: पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) की शान हथिनि वत्सला अब इस दुनिया में नहीं रही। बीते दिन मंगलवार को दोपहर करीब 1:30 बजे वत्सला ने आखिरी सांस ली। बता दें कि ये एशिया की सबसे बुजुर्ग हथिनि थी। पन्ना टाइगर रिजर्व की इस हथिनि को दादी भी कहा जाता था क्योंकि वत्सला अन्य हथिनियों के बच्चों की देखभाल भी करती थी।

Panna Oldest Elephant Vatsala Death

एशिया की सबसे बुजुर्ग हथिनि वत्सला का निधन Panna Oldest Elephant Vatsala Death

ऐसे में इस उम्रदराज हथिनि की मौत से ना सिर्फ पन्ना टाइगर रिजर्व(Panna tiger Reserve) बल्कि पूरा देश दुखी है। ये भारत के लिए अपूर्णीय क्षति है। बता दें कि हथिनि की उम्र करीब 100 से भी ज्यादा थी। काफी लंबे समय से वो बीमार भी चल रही थी। बता दें कि वत्सला पन्ना में देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र थी। कहा जाता है कि ये दुनिया की सबसे ज्यादा उम्र की हथिनी थी। लेकिन जन्म का रिकॉर्ड ना होने पर वत्सला की एक्जेक्ट उम्र का पता नहीं लग पाया।

दर्ज नहीं हो पाया रिकॉर्ड

वत्सला के निधन के बाद हिनौता कैम्प में हथिनी का अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि वत्सला की उम्र 100 साल से भी ज्यादा थी। लेकिन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में वो अपना नाम दर्ज नहीं कर पाईं। इसका कारण था कि पीटीआर कार्यालय में वत्सला के जन्म का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। हालांकि उम्र का पता लगाने के लिए दांतों के सैंपल भी लैब जांच में भेजे गए लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली। जिसके चलते वत्सला का नाम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सका।

दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी का रिकॉर्ड किसके नाम?

फिलहाल दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी का रिकॉर्ड ताईवान की हथिनी लिंगवान के नाम है। बता दें कि वत्सला काफी शांत और संवेदनशील स्वभाव की थी। पन्ना में हाथियों के बुनबे में वो बच्चों की दादी मां की तरह देखभाल करती थी। एक कुशल दाई की भूमिका निभाने में वो माहिर थी।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड
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