संविधान दिवस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, न्यायपालिका लोगों तक पहुंचे, ना कि उनसे आने की अपेक्षा करें

 

cji chandrachur
संविधान दिवस पर देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) धनन्जय यशवंत चंद्रचूड़ ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कॉलेजियम सहित कोई भी संस्था परिपूर्ण नहीं है और इसका समाधान मौजूदा व्यवस्था के भीतर काम करना है। प्रधान न्यायधीश ने ये बात शनिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित संविधान दिवस समारोह में कही। उन्होने कहा कि न्यायाधीश वफादार सैनिक होते हैं जो संविधान लागू करते हैं।

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत का संविधान सिर्फ कानून की नहीं, बल्कि मानवीय संघर्ष और उत्थान की कथा भी कहता है। पिछड़े और समाज के हाशिए पर पड़े दलितों ने इसकी बुनियाद रखी है। संविधान का निर्माण लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ब्रिटिश राज और उससे पहले के कोर्ट में नागरिकों के अधिकारों का हनन भी होता था।

अब हाशिये पर मौजूद लोगों के लिए सुलभ न्याय पहुंचाने की प्रक्रिया को निरंतर आगे बढ़ाए रखने की जरूरत है। डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि चीफ जस्टिस होने के नाते मेरा दायित्व है कि सुप्रीम कोर्ट में जजों के साथ और जिला स्तर पर न्यायपालिका के साथ मिलकर हाशिए पर मौजूद लोगों के लिए भी न्याय सुलभ कराने के इंतजाम करूं। यह आवश्यक है कि न्यायपालिका लोगों तक पहुंचे और लोगों से उस तक पहुंचने की अपेक्षा ना करे। कोरोना महामारी के बीच हमने तकनीकी ढांचे को मजबूत कर जनता तक न्याय पहुंचाया।

सभी हाईकोर्ट और जिला अदालतों से अनुरोध है कि इस ढांचे को खत्म करने की नहीं, बल्कि आगे बढ़ाए रखने की जरूरत है, जिससे इसके जरिए हम सिस्टम को और सुविधाजनक बनाए रख सकें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राष्ट्रपति आज कई योजनाओं को शुरू करेंगी। वर्चुअल जस्टिस क्लॉक, डैश बोर्ड, जस्टिस मोबाइल एप सहित कई तकनीकी इंतजाम शुरू किए जाने हैं। डिजिटल ग्रीन कोर्ट पेपरलेस होंगी. भारतीय न्यायपालिका जनता के द्वार तक जाकर न्याय उपलब्ध कराने को तैयार है। युवा सोच न्याय सुलभ कराने की इस मुहिम में आगे आएं।

किरेन रिजिजू ने संविधान दिवस पर कही ये बात

इस अवसर पर विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था कि आजादी के बाद हम अपनी विफलताओं का ठीकरा अंग्रेजों पर नहीं फोड़ेंगे। हमें अपनी नाकामी की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। न्याय पाने के लिए सुविधाएं पहली शर्त हैं, जिसे हम आधुनिक तकनीक से हासिल कर सकते हैं। जनता को कानून की जानकारी लोकभाषा में उपलब्ध करा सकते हैं। लीगल टर्मिनलोजी को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराना होगा। बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने पूर्व चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई में भारतीय भाषा समिति स्थापित की है। लोकल लैंग्वेज इको सिस्टम के तहत कृत्रिम ज्ञान के जरिए स्थानीय भाषाओं को कानूनी ज्ञान के प्रति समृद्ध किया जाएगा।

संविधान दिवस आज

आज 26 नवंबर 2022 को देश संविधान दिवस मना रहा है। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया था और इस दिन को वर्ष 2015 से पहले तक विधि दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन 2015 से इसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जान लगा।

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