NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का हमला, आलोक शर्मा बोले अंधकार में युवाओं का भविष्य

नीट पेपर लीक मामले पर कांग्रेस ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। आज उत्तराखंड प्रदेश मुख्यालय में राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस पर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मोदी सरकार ने 2017 में की थी NTA की स्थापना
आलोक शर्मा ने नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार हमारे आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकार में डालने का काम कर रही है। शर्मा ने कहा कि एनटीए कोई सरकारी एजेंसी नहीं है ये सिर्फ एक एनजीओ है। शर्मा ने कहा कि इस संस्था की स्थापना मोदी सरकार ने 2017 में की थी। उस समय मोदी सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन इस बार जनता को एक “पेपर लीक करने वाली सरकार” मिली है। 2014 से अब तक, केंद्र और राज्य सरकारों के तहत लगभग 89 परीक्षा पेपर लीक हुए हैं, जिनमें से लगभग 58 परीक्षाओं को दोबारा करवाना पड़ा।
शर्मा ने कहा अहम सवाल यह है इस NTA को किसने बनाया? NTA का गठन BJP और RSS के कुछ लोगों के आपसी तालमेल से हुआ था, जिन्होंने बाद में अपने पसंदीदा साथियों को इसमें अहम पदों पर नियुक्त कर दिया। जब 2017 में पहली बार इस एजेंसी की स्थापना हुई थी, तो इसकी वैधता को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।
2017 से पहले CBSE आयोजित करता था परीक्षाएं
शर्मा ने कहा 2017 से पहले, ये परीक्षाएं CBSE द्वारा आयोजित की जाती थी। लेकिन इसमें शामिल लोगों ने जिनमें से कई मध्य प्रदेश के कुख्यात ‘व्यापम घोटाले’ (एक ऐसा घोटाला जिसमें 60 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई थी) से जुड़े हैं। असल में एक “व्यापम पार्ट 2” रच दिया है। 2015 और 2017 के बीच, यह समझते हुए कि वे मौजूदा व्यवस्था के ज़रिए “बैक-डोर एंट्री” (अवैध नियुक्तियां) नहीं करवा सकते, उन्होंने यह साज़िश रची।
शर्मा ने कहा 2017 में, पहला SSC पेपर लीक हुआ। छात्र विरोध प्रदर्शन करते हुए SSC दफ्तरों के बाहर ठंड में बैठे रहे। इसके बाद, NTA का गठन हुआ और उसने 14 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें से छह लीक हो गईं। ये ऐसी घटनाएं हैं जिनकी आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट की गई है और जिन्हें सबके सामने लाया गया है। शर्मा ने कहा अब, समझने वाली अहम बात यह है NTA को इतनी बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करने का अधिकार किसने दिया? क्या यह MHRD था? क्या यह केंद्र सरकार थी? आज भी, देश इस बात से अनजान है कि यह अधिकार आखिर आया कहां से।
आरोपियों में BJP नेता शामिल
शर्मा ने आगे कहा कि NEET का पेपर 21 तारीख को लीक हुआ, फिर 24 तारीख को, और एक बार फिर 26 तारीख को। इसके अलावा, इस घोटाले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे मुख्य रूप से BJP के नेता हैं, जिनके पूरे परिवारों का चयन पिछले साल दाखिले के लिए हो गया था। इस तरह, अब यह तथ्य सामने आ रहा है कि शायद पिछले साल भी पेपर लीक हुआ था। NEET जैसी परीक्षा के लिए जिसमें 2.4 से 3 मिलियन छात्र शामिल होते हैं और माता-पिता काफी आर्थिक संसाधन खर्च करते हैं।
कथित तौर पर पिछले 15 दिनों से पेपर WhatsApp ग्रुप्स पर घूम रहा था। कई लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। परीक्षा 3 तारीख को हुई थी, और सच्चाई सामने आने तथा NTA द्वारा आखिरकार कार्रवाई करने में चार दिन लग गए। अपनी शुरुआत से ही, NTA हमेशा शक के घेरे में रहा है; इसके बावजूद, एक भी अधिकारी को जेल नहीं भेजा गया है।
केंद्रीय मंत्री से की इस्तीफे की मांग
अलोक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि नीट परीक्षा को रद्द करते हुए पेपर लीक मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी मे कराई जाए। साथ ही उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा देने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले में जेपीसी गठित की जाए और 2024 की नीट परीक्षा की भी जांच कराई जाए।