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इस घाट पर माता सीता ने की पहली छठ पूजा, आज भी मौजूद हैं निशान, जानें यहां

भारत में छठ का महापर्व शुरू हो चुका है। छठ पर्व का आज दूसरा दिन है। आज के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं केवल एक ही समय शाम में मीठा भोजन करती हैं। इस दिन मुख्य रूप से चावल और गुड़ की खीर का प्रसाद बनाया जाता है। जिसे मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर बनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में छठ का व्रत hunr बार किसने रखा था और कहां रखा गया था।

मुंगेंर में गंगा नदी के तट पर हुई पहली छठ पूजा

बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सीता ने छठ का व्रत रखा था। माना जाता है कि मां सीता अपनी पहली छठ पूजा बिहार के मुंगेंर में गंगा नदी के तट पर की थी। जब मां सीता भगवान राम के साथ वनवास गई थीं, तो उसी समय के दौरान उन्होनें छठ का व्रत रखा था। इसके बाद से छठ पर्व की शुरूआत हुई।

बबुआ घाट पर माता सीता के पदचिन्ह्

मान्यता है कि मां सीता ने मुंगेर जिले के बबुआ घाट के पश्चिमी तट पर छठ पूजा की थी, जहां उनके चकण आज भी मौजूद हैं। मां सीता के चरण बड़े से पत्थर पर अंकित हैं। यहां अब एक विशाल मंदिर बनाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि किमुद्गलश्रषि  के कहने पर ही माता सीता ने व्रत रखा था।

सूप, डाला और लोटे के निशान मौजूद

लोक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता ने कार्तिक मास की षष्ठी तिथि पर भगवान सूर्य देव की उपासना मुंगेर के बबुआ गंगा घाट के पश्चिमी तट पर की थी। यहां मौजूद शिलपट पर आज भी मां सीता के व्रत रखने के अस्तित्व मिलते हैं। यहां सूप, डाला और लोटे के निशान भी बने हैं। वहीं आपको बता दें कि मंदिर का गर्भगृह साल में छह महिने तक गंगा के गर्भ में समाया रहता है। मां सीता के चरणों के दर्शन करने के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

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