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MIG-21 फाइटर जेट विमान, उड़ता हुआ ताबूत, कई बार हुआ हादसे का शिकार, लेकिन फिर भी सेना के लिए खास, जानें कारण

राजस्थान के हनुमानगढ़ में सोमवार की सुबह MIG-21 फाइटर जेट विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक पुरुष समेत तीन लोग घायल हैं। लेकिन ये पहली बार नहीं है जब MIG-21 फाइटर के साथ क्रैश होने की खबर सामने आई हो। बल्कि इससे पहले भी MIG-21 फाइटर जेट क्रेश हुआ है। जिसने कई सारे सवाल भी खड़े किए हैं।

उड़ता हुआ ताबूत MIG-21 फाइटर का दसूरा नाम

MIG-21 फाइटर को उड़ता हुआ ताबूत कहा जाता है क्योंकि यह लंबे समय से इंडियन एयरफोर्स की कामयाबी का आधार रहा है। चाहे वो करगिल युद्धहो या फिर 1971 का युद्ध सभी मोर्चों पर इस विमान ने अपनी कामयाबी का सबूत पेश किया है। हालांकि ये फाइटर विमान कई बार हादसों का शिकार हुआ, जिसमें कई पायलटों और जवानों की जान जा चुकी है।

1955 में हुआ था MIG-21 फाइटर का निर्माण

बताया जाता है कि 1955 के करीब रूस की मिकोयान कंपनी ने इस विमान का निर्माण किया था। इसे भारतीय वायु सेना में साल 1963 में शामिल किया गया। भारत ने कुल 874 मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था। वर्तमान में वायुसेना इसके अपग्रेडेड वर्जन मिग-21 बाइसन का प्रयोग करती है। भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इस विमान को लाइसेंस के तहत अपग्रेड करती है।

मिग-21 विमानों की खासियत

कहा जाता है कि मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान मिग कई घातक एयरक्राफ्ट शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है। इस लड़ाकू विमान की स्पीड 2229 किमी प्रतिघंटा है। जो उस समय सबसे तेज उड़ान भरने वाला लड़ाकू विमान था। इसकी रेंज 644 किलोमीटर के आसपास थी, हालांकि भारत का बाइसन अपग्रेडेड वर्जन लगभग 1000 किमी तक उड़ान भर सकता है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा हुआ है, जो विमान को सुपरसोनिक की रफ्तार प्रदान करता है।

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