खाकी ने निभाया बेटे का फर्ज, हरकी पैड़ी में थेले बेचने वाली 95 साल की अम्मा का किया अंतिम संस्कार

हरिद्वार : उत्तराखंड पुलिस ने एक बार फिर से अपने नाम को सार्थक कर दिया है। मित्र, सेवा, सुरक्षा…इस नाम को उत्तराखंड पुलिस ने एक बार फिर सही साबित कर दिखाया है। आपको बता दें कि हरिद्वार की पुलिस ने बेटे का फर्ज निभाते हुए हर की पैड़ी में थेले बेचने वाली 95 साल की अम्मा का विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार किया। दारोगा ने बेटे का फर्ज निभाते हुए उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान आइएएस दीपक रावत ने भी शोक व्यक्त किया। आपको बता दें कि गंगा घाट पर थेले बेच रही इस अम्मी की दीपक रावत ने भी आर्थिक समेत अन्य रुप से मदद की थी।

हरकी पैड़ी पर थैले बेचती थी अम्मा

हरिद्वार पुलिस ने इमोशनल पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि एक बार फिर उत्तराखण्ड पुलिस के जवानों ने साबित किया है कि इंसानियत का रिश्ता सभी रिश्तों से बड़ा होता है। सोमवार शाम हरकी पैड़ी पर थैले बेचकर अपना गुजर बसर करने वाली पुलिस की अम्मा (संतोषी देवी) की सांसों की लड़ी टूट गयी। हरकी पैड़ी चौकी प्रभारी अरविन्द रतूड़ी ने बेटे का फर्ज निभाते हुए रोड़ी बेलवाला चौकी प्रभारी पवन डिमरी और साथी जवानों के साथ अम्मा के शव न सिर्फ कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार कर नम आंखों से विदाई दी। विगत वर्ष लॉकडाउन से हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के जवान निस्वार्थ भाव से अम्मा के खाने-पीने, दवाई सभी का इंतजाम कर उनकी देखभाल कर रहे थे।

हरिद्वार पुलिस की पोस्ट

हरिद्वार पुलिस ने लिखा कि ये रिश्ता – बहुत कुछ कहलाता है, कुछ रिश्ते हमें जन्मजात मिलते हैं और कुछ रिश्तों का चुनाव हम अपनी पसंद से करते हैं। अपने जीवन में इन चुने हुए रिश्तों में हम अक्सर अपने नफा-नुकसान और वैचारिक तालमेल का तोल-मोल करने के बाद ही फैसला करते हैं। आज आपका परिचय एक ऐसे ही चुने गए माँ-बेटे के रिश्ते से करवा रहे हैं किन्तु इसमें न तो नफा-नुकसान पर गौर किया गया और न ही वैचारिक तालमेल पर। दिखी तो बस अपने परिजनों से दूर आत्मसम्मान के साथ रेन बसेरे मे अपने दिन गुजार रही महिला की और खाकी वर्दी पहने सिपाहियों की टोली की जिनकी अनायास ही उस स्वाभिमानी महिला से मुलाकात हो गयी। वह महिला कभी मालद्वीप घाट तो कभी सुभाष घाट, कभी तिरछा पुल तो कभी रोड़ी बेलवाला घाट पर घूमते हुए आने जाने वाले यात्रियों को पॉली बैग बेचकर अपना जीवनयापन किया करती थी।

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