ट्रेनिंग के नाम पर रेलवे प्लेटफार्म पर रोज गिनवाते रहे गाड़ियां, नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी

trains on plateformदेश में बेरोजगारी के हालात ऐसे हैं कि युवा किसी भी तरह बस रोजगार पा लेना चाहते हैं। वो भी अगर कोई उन्हे रेलवे में नौकरी का ख्वाब दिखा दे तो उस ख्वाब को पूरा करने के लिए युवा कोई भी रास्ता अख्तियार करने को तैयार हैं, कोई भी कीमत देने को तैयार हैं। लेकिन सच ये भी है कि ऐसे ही युवा अतिउत्साह में ठगी का शिकार भी हो जा रहें हैं। ऐसा ही एक मामला दिल्ली में सामने आया है जहां रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपए ठग लिए गए।

रोज गिन रहे थे रेलगाड़ियां

चेहरे पर नौकरी पाने खुशी लिए तमिलनाडु के कम से 28 युवक रोज नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अलग-अलग प्लेटफार्मों परआने-जाने वाली ट्रेनों तथा उनके डिब्बों की गिनती कर रहे थे। उन्हें बताया गया था कि यही उनका काम है।  करीब एक महीने तक रोजाना आठ घंटे तक वे इस तरह ट्रेनों की गिनती करते रहे।  वे इस बात से बेखबर थे कि वे नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

शिकायद दर्ज हुई थी खुला मामला

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दायर एक शिकायत के बाद इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। दरअसल इन युवकों को बताया गया था कि ट्रेनों की गिनती का काम यात्रा टिकट परीक्षक (टीटीई), यातायात सहायकों और क्लर्कों के पदों के लिए उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा था। रेलवे में नौकरी पाने के लिए उनमें से हर युवक ने दो लाख से 24 लाख रुपये के बीच की रकम दी थी। बाद में उन्हें पता चला कि वे लोग एक बड़ी ठगी का शिकार हो चुके हैं।

करोड़ों रुपए की ठगी

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में 78 वर्षीय एम सुब्बुसामी द्वारा दर्ज कराई गई।शिकायत के अनुसार, जून और जुलाई के बीच हुए एक महीने के प्रशिक्षण के लिए, धोखेबाजों के एक ग्रुप द्वारा पीड़ितों से 2. 67 करोड़ रुपये ठग लिए गए। पूर्व सैनिक सुब्बुसामी पीड़ितों को कथित धोखेबाजों के संपर्क में लाए थे, लेकिन उन्होंने दावा किया कि वह इस बात से अनजान थे कि यह सब एक घोटाला था और वह भी उनके जाल में फंस गए।

2 से 24 लाख तक की उगाही

मदुरै के एक पीड़ित 25 वर्षीय स्नेहिल कुमार ने कहा, ‘हर कैंडिडेट ने सुब्बुसामी को दो लाख रुपये से लेकर 24 लाख रुपये तक की रकम का भुगतान किया, जिसने विकास राणा नाम के एक व्यक्ति यह रकम दी। राणा ने दिल्ली में उत्तर रेलवे कार्यालय में खुद को एक डिप्टी डायरेक्टर बताया था।’ ज्यादातर पीड़ित इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि वाले ग्रैजुएट हैं।

एमपी क्वार्टर में हुई थी डील

तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में अपने गृहनगर से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से सुब्बुसामी ने कहा, ‘रिटायरमेंट के बाद से मैं अपने इलाके के बेरोजगार युवाओं को बिना किसी आर्थिक फायदे के  उपयुक्त नौकरी खोजने में मदद कर रहा हूं।’ एफआईआर में उसने आरोप लगाया है कि वह दिल्ली के एक एमपी क्वार्टर में कोयम्बटूर निवासी शिवरमन नामक व्यक्ति से मिला था। शिवरमन ने सांसदों और मंत्रियों के साथ अपनी जान-पहचान का दावा किया और कुछ पैसे लेकर बेरोजगारों के लिए रेलवे में रोजगार दिलाने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद सुब्बसामी नौकरी की तलाश कर रहे तीन लोगों के साथ दिल्ली आया और बाद में नौकरी पाने के लिए 25 लोग और उनके साथ आए।

रेलवे ने लोगों को अलर्ट किया

ईओडब्ल्यू ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि यह एक नौकरी घोटाला था और आगे की जांच चल रही है। रेल मंत्रालय में मीडिया और संचार के अतिरिक्त महानिदेशक योगेश बवेजा ने इस तरह के नौकरी घोटालों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि रेलवे बोर्ड नियमित रूप से सलाह जारी कर रहा है और आम लोगों को इस तरह की धोखाधड़ी के खिलाफ सतर्क कर रहा है।

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