ईरान युद्ध में मारे गए भारतीय का शव पहुंचा, दाह संस्कार की बजाय पिता क्यों पहुंचे हाई कोर्ट?

भारतीय नागरिक दीक्षित सोलंकी के जले हुए अवशेष फाइलनी भारत पहुंच गए है। 32 साल के दीक्षित की एक मार्च को ओमान तट के पास उनके टैंकर पर मिसाइल हमले के चलते मौत हो गई थी। अब करीब 35 दिन बाद यानी कि रविवार तड़के उनका शव शारजाह से मुंबई लाया गया। आपको बता दें कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के नाविक दीक्षित पहले भारतीय पीड़ितों में से एक हैं। इसी बीच अब जब उनका शव मुंबई पहुंचा है तो उनके पिता ने दाह संस्कार करने की बजाय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
ईरान युद्ध में मारे गए भारतीय का शव पहुंचा
दरअसल कांदिवली के नाविक दीक्षित सोलंकी के जले हुए अवशेष मुंबई पहुंचे। हालांकि उनके परिवार ने उनका अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक DNA टेस्ट से दीक्षित की पहचान की पुष्टि नहीं हो जाती, वो तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
दाह संस्कार की बजाय पिता पहुंचे हाई कोर्ट
डीएनए की मांग को लेकर आज सोमवार को परिवार बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। परिवार ने अनुरोध किया कि इस मामले को कलीना फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजा जाए। मीडिया से बातचीत के दौरान परिवार के वकील ने अवशेष शब्द कहा। मतलब की वहां कोई शरीर या शव नहीं था।
शिपिंग मंत्रालय ने क्या कहा?
तो वहीं शिपिंग मंत्रालय की माने तो जहाज पर केवल एक ही के हताहत की पुष्टि हुई थी। जिसकी पहचान स्थापित कर ली गई थी। शिपिंग महानिदेशालय (DG) के अधिकारी ने पुष्टि की कि अवशेषों को कार्गो उड़ान से मुंबई लाया गया है।
बिना डीएनए टेस्ट नहीं करेंगे अंतिम संस्कार
बता दें कि नाविक के पिता अमृतलाल (64), और उनकी बहन मिताली (33) ने गुरवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने अवशेषों को जल्द लाने की बात कही थी। याचिका के तीन दिनों के अंदर ही ताबूत आ गया। पिता ने कहा कि वो डीएनए टेस्ट के बाद ही अंतिम संस्कार करेंगे।