पूर्व सीएम हरीश रावत का दावा, सत्ता में आए तो करेंगे ये काम…पढ़िए

देहरादून l हरीश रावत सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। उत्तराखंड में चुनावी माहौल है। रातनीतिक पार्टियां जीत हासिल करने के लिए लाख दावे कर रही हैं तो वहीं आचार संहिता लगने के बाद मैदान में भले ही सन्नाटा छा गया हो लेकिन पार्टियों के मुख्यालयों में चहल कदमी शुरु हो गई है। टिकट को लेकर मंथन जारी है। इसी बीच हरीश रावत ने बड़ा दावा किया है। हरीश रावत ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो फिर से हम चारधाम यात्रा के शीतकालीन आवासों तक यात्रा प्रारम्भ करवाएंगे और उसको एक नया रूप अपने सांस्कृतिक-धार्मिक पर्यटन के साथ जोड़ेंगे ताकि सभ्यता के विकास स्थलों के माध्यम से गंभीर परवर्ती के दर्शनार्थी शीतकाल में भी हमारे उत्तराखण्ड में आ सकें और उत्तराखण्ड की ठंड में जो छिपी हुई आनंदमय भावना है उसका लाभ उठा सकें।
हरीश रावत ने लिखी पोस्ट
हरीश रावत ने लिखा कि हमने किया है आगे भी करके दिखाएंगे
चारधाम यात्रा
2014 में जब निर्धारित समय पर चारधाम यात्राओं को प्रारम्भ करना लगभग असंभव लग रहा था, उसको संभव बनाना ही एक बड़ी चुनौती थी। हमने राज्य के अर्थव्यवस्था और व्यवसायों के गिरते हुए मनोबल को उठाने के लिए एक साहसिक निर्णय लिया, वो निर्णय था शीतकालीन चारधाम यात्रा अर्थात अपने शीतकालीन आवास स्थलों में भगवान शिव, भगवान विष्णु, माँ गंगा, माँ यमुना के दर्शन लोग कर सकें। बड़ी मुश्किल से मैं, आदरणीय तीर्थ पुरोहितों को सहमत करवा पाया, उनकी सहमति मिल गयी मगर संदेह उनके मन में बना रहा। बल्कि कुछ लोगों ने सवाल उठाये कि मैं सैर-सपाटा टूरिज़्म के तौर पर चारधाम यात्राओं को प्रारम्भ करना चाहता हूँ, इसलिये मैं ये कदम उठा रहा हूँ। बहरहाल हमने शीतकालीन यात्राएं प्रारम्भ करवाई, रिस्पांस तब भी कमजोर था, आज भी कमजोर है। मगर धीरे-धीरे इससे एक माहौल बना, आत्मविश्वास बढ़ा और शीतकाल में भी लोगों के लिए उत्तराखंड में प्रयाप्त आकर्षण है। मसूरी-नैनताल से आगे बढ़कर के है, इसका दुनिया को हमने एहसास करवाया। हमारे बाद आने वालों ने इस एहसास व इस शुरुवात को आगे बढ़ाने के बजाय इसको उपेक्षित रखा। हम सत्ता में आएंगे तो फिर से हम चारधाम यात्रा के शीतकालीन आवासों तक यात्रा प्रारम्भ करवाएंगे और उसको एक नया रूप अपने सांस्कृतिक-धार्मिक पर्यटन के साथ जोड़ेंगे ताकि सभ्यता के विकास स्थलों के माध्यम से गंभीर परवर्ती के दर्शनार्थी शीतकाल में भी हमारे उत्तराखण्ड में आ सकें और उत्तराखण्ड की ठंड में जो छिपी हुई आनंदमय भावना है उसका लाभ उठा सकें, प्रतीक्षा करें मार्च 2022 का।

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