उत्तराखंड : सस्ता गल्ला विक्रेता हारा कोरोना से जंग तो निरीक्षक रवि सनवाल ने उठाया बच्चे का खर्चा उठाने का बीड़ा

हल्द्वानी: कोरोना ने कईयों की ज़िंदगी को छीन लिया कईयों का परिवाार उजाड़ दिया और कई बच्चों को अनाथ कर दिया. वहीं कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक खास योजना की शुरुआत की है जिसमें अनाथ बच्चों के भरण पोषण का खर्च सरकार उठाएगी. लेकिन अगर कोई चाहे तो बिन सरकार के मदद के भी यह काम कर सकता है और कई लोगों ने ही नेक काम किया भी है।

जी हां ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला हल्द्वानी में। बता देगी हल्द्वानी में पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने एक मिसाल कायम की है। दरअसल हल्द्वानी में सस्ता गल्ला विक्रेता व्यक्ति का हंसता खेलतापरिवार कोरोना काल में उजड़ गया।कोरोना से एक ही परिवार के दो लोग जिंदगी खो बैठे। बता दें कि कुंवरपुर निवासी लाखन सिंह धारियाल (37 वर्षीय) कुंवरपुर में सस्ता गल्ला की दुकान है। परिवार में पिता नर सिंह, मां गीता देवी, भाई, पत्नी और दो बेटे थे। करीब 10 दिन पहले परिवार के तीन लोग कोरोना की चपेट में आ गए थे, सभी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार सुबह लाखन सिंह की मां गीता देवी की मौत हो गई। शनिवार करीब 11 बजे लाखन सिंह की भी मौत हो गई। एक परिवार के दो लोगों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। इस मुश्किल वक्त में सस्ता गल्ला विक्रेता की परिवार की मदद के लिए पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल आगे आए हैं। उन्होंने बताया कि लाखन सिंह धारियाल अपने अंतिम समय में बच्चे और पत्नी को लेकर चिंतित थे। उन्होंने कहा कि वह एक बेटे के पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएंगे।

पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने कहा कि लाखन सिंह धारियाल ने दो दिन पहले अस्पताल से मैसेज किया था। उनकी ओर से निवेदन किया गया कि उनकी मौत के बाद दुकान को पत्नी के नाम कर दिया जाए, ताकि वह दोनों बच्चों को पाल सके।

पूर्ति निरीक्षक ने पीड़ित को दिलासा दिया कि उसे कुछ नहीं होगा वह ठीक हो पर घर आएगा लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गया। पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल ने बताया कि साथ ही दुकान भी पत्नी की नाम की जाएगी

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